मुंबई , अप्रैल 24 -- महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने शुक्रवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अधिक संवेदनशील और मानव-केंद्रित बनाने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि नैतिक आधार के बिना अनियंत्रित तकनीकी प्रगति समाज के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी कर सकती है।
बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित एटलस स्किलटेक यूनिवर्सिटी में 'सेंटर फॉर इनोवेशन' का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल श्री वर्मा ने कहा कि आने वाले वर्षों में एआई और मशीन लर्निंग विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तनकारी भूमिका निभाएंगे, लेकिन इनके लाभों और जोखिमों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि एआई का विस्तार समावेशिता की कीमत पर नहीं होना चाहिए और इसके लाभ समाज के सबसे हाशिए पर रहने वाले वर्गों तक पहुँचने चाहिए।
राज्यपाल ने 'गवर्निंग एआई: लॉ, टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी' विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी का भी उद्घाटन किया। उभरती प्रौद्योगिकियों के नैतिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने आगाह किया कि स्पष्ट उद्देश्यों के बिना उन्नत उपकरणों की उपलब्धता, या मानवीय मूल्यों के बिना वैज्ञानिक प्रगति खतरनाक साबित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि एआई के लिए नियामक ढांचे में करुणा, सहानुभूति और संवेदनशीलता को शामिल किया जाना चाहिए। राज्यपाल ने विशेष रूप से वंचित समुदायों के स्कूली और कॉलेज के छात्रों के बीच इन मूल्यों को विकसित करने का आह्वान किया। भारत की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 'जय जवान, जय किसान' का नारा 'जय विज्ञान' और अब 'जय अनुसंधान' तक पहुँच गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग विज्ञान और नवाचार का है, जिसके लिए प्रगति के प्रति संतुलित और नैतिक दृष्टिकोण आवश्यक है।
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