मुंबई , फरवरी 21 -- महाराष्ट्र का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होने जा रहा है, लेकिन राज्य के विधायी इतिहास में पहली बार ऐसी स्थिति बनी है कि विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में विपक्ष के नेता का पद खाली है।

वर्ष 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद 15वीं विधानसभा का गठन किया गया था और इसका पहला सत्र दिसंबर 2024 में आयोजित हुआ था। परंपरा के अनुसार, पहले सत्र के दौरान ही विपक्ष के नेता का चयन कर लिया जाता है।

यह नियुक्ति हालांकि अभी तक अंतिम रूप नहीं ले पायी है, क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष ने इस मामले को लंबित रखा है। उन्होंने उस नियम का हवाला दिया है, जिसके अनुसार सदन में विपक्ष के नेता के पद की पात्रता के लिए सबसे बड़े विपक्षी दल के पास सदन की कुल सदस्य संख्या का कम से कम 10 प्रतिशत बल होना अनिवार्य है। वर्तमान में कोई भी विपक्षी दल इस आवश्यकता को पूरा नहीं करता है। विधानसभा में शिवसेना (यूबीटी) के 20 विधायक हैं। उसने चार मार्च, 2025 को पत्र सौंपकर वरिष्ठ विधायक भास्कर जाधव को विपक्ष के नेता पद के लिए प्रस्तावित किया था। इस सिफारिश के बावजूद अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है और बिना समाधान के इस प्रस्ताव के एक वर्ष पूरे होने वाले हैं। ऐसी ही स्थिति विधान परिषद में भी बनी हुई है। शिवसेना (यूबीटी) के अंबादास दानवे, जो विपक्ष के नेता थे। पिछले साल अगस्त में उनका कार्यकाल समाप्त हो गया था। इसके बाद से यह पद खाली पड़ा है।

दिसंबर 2025 के शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस ने परिषद के सभापति राम शिंदे को पत्र भेजकर सतेज पाटिल के नाम की इस पद के लिए सिफारिश की थी। उस प्रस्ताव पर भी अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

यह मुद्दा जब उठाया गया, तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि विपक्ष के नेता की नियुक्ति का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषदके सभापति के पास है। उन्होंने कहा कि सरकार उनके लिये किसी भी निर्णय का पालन करेगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उन्हें इन नियुक्तियों पर कोई आपत्ति नहीं है।

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