मुंबई , जुलाई 29 -- महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बुधवार को विद्यालयों में छात्रों के लिए सुरक्षित, पौष्टिक और संतुलित भोजन सुनिश्चित करना अनिवार्य कर दिया तथा विद्यालय परिसरों और मुख्य द्वार के 50 मीटर के दायरे में उच्च वसा, शर्करा और नमक (एचएफएसएस) वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री, विज्ञापन और प्रचार पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
यह आदेश राज्य बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएससी और अन्य बोर्डों से संबद्ध सरकारी, सहायता प्राप्त, निजी और आवासीय विद्यालयों पर लागू होगा, जिसमें पूर्व-प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक के छात्र शामिल हैं। इसके दायरे में विदयालय के छात्रावास, कैंटीन, छोटी दुकानें, मध्याह्न भोजन केंद्र और पीएम-पोषण रसोई भी आयेंगी। इस निर्देश के तहत, विद्यालयों में काम करने वाले सभी खाद्य विक्रेताओं और संचालकों के पास भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) का वैध पंजीकरण या लाइसेंस होना अनिवार्य है।
एफडीए ने विद्यालयों को फल, सब्जियां, मोटे अनाज, साबुत अनाज, दालें और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों सहित स्वास्थ्यवर्धक भोजनों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया है। विद्यालयों को सुरक्षित पेयजल सुविधाएं, उचित स्वच्छता, भोजन भंडारण, तापमान नियंत्रण और अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली बनाये रखने का भी निर्देश दिया गया है।
निगरानी व्यवस्था में प्रत्येक विद्यालय को एक 'खाद्य सुरक्षा प्रदर्शन बोर्ड' स्थापित करना होगा, एक 'खाद्य सुरक्षा पर्यवेक्षक' नियुक्त करना होगा और एक 'स्वास्थ्य एवं कल्याण राजदूत' या नोडल अधिकारी नामित करना होगा।
निर्देशानुसार वर्ष में कम से कम दो बार खाद्य सुरक्षा निरीक्षण करना और प्रत्येक वर्ष प्रत्येक विद्यालय से कम से कम एक खाद्य नमूना एकत्र करना आवश्यक होगा। उल्लंघन करने पर सुधारात्मक नोटिस, लाइसेंस का निलंबन या रद्द करना, खाद्य वस्तुओं की जब्ती, मुकदमा और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
एफडीए ने कहा कि यह पहल 'खाद्य सुरक्षा और मानक (विद्यालय में बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन और संतुलित आहार) नियम, 2020' पर आधारित है और इसका उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है।
खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंडे ने इस अभियान को 'सुरक्षित भोजन - स्वस्थ बचपन - सशक्त महाराष्ट्र' बताया और कहा कि बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन सुनिश्चित करना सामूहिक जिम्मेदारी है।
विभाग ने बताया कि 42 जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से 3,457 विद्यालयों के 4,919 शिक्षकों को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है। पोषण नीतियां अपनाकर, जागरूकता सत्र आयोजित कर और स्वस्थ कैंटीन विकसित कर विद्यालयों को 'सही आहार वाले विद्यालय' बनने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
विद्यालय शिक्षा विभाग को सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के लिए नोडल एजेंसी नामित किया गया है, जबकि शिक्षा बोर्डों और स्थानीय अधिकारियों से नये खाद्य सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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