मुंबई , सितंबर 16 -- महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बारिश में लंबे अंतराल के कारण खरीफ फसल पर संकट मंडराने लगा है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने सूखे जैसी स्थिति का आकलन करने और राहत उपाय लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को प्रशासन को निर्देश दिया है कि पांच अक्टूबर से सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में पंचनामा (क्षेत्र में जाकर स्थिति और नुकसान का आकलन) किया जाये। इसका उद्देश्य फसलों को हुए नुकसान और लंबे समय से चल रहे सूखे के असर का पता लगाना है। इस प्रक्रिया से जमीन पर स्थिति का विस्तृत आकलन करने में मदद मिलेगी और सरकार को उचित राहत उपाय तय करने में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार, अधिकारी फसलों की स्थिति, पानी की उपलब्धता और बारिश की कमी के कारण प्रभावित क्षेत्रों पर पड़े कुल असर का आकलन करेंगे। यह आकलन उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा, जहां बारिश में लंबे अंतराल के कारण खेतों में खड़ी खरीफ फसलों पर बुरा असर पड़ा है।
राज्य सरकार ने कहा है कि जहां जरूरत होगी, वहां कमी से निपटने के लिए राहत उपाय तुरंत शुरू किए जाएंगे। प्रशासन को पेयजल की कमी और सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण उत्पन्न होने वाली अन्य समस्याओं से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
बारिश में लंबे समय तक आए इस अंतराल ने उन किसानों की चिंता बढ़ा दी है, जो खरीफ मौसम के लिए काफी हद तक मानसून पर निर्भर रहते हैं।
सोयाबीन, कपास, तुअर और बारिश पर निर्भर अन्य फसलें उस समय विशेष रूप से प्रभावित हो सकती हैं, जब फसल की महत्वपूर्ण बढ़वार के समय बारिश में लंबे समय तक अंतराल हो। सरकार पंचनामों से मिले निष्कर्षों का इस्तेमाल उन क्षेत्रों की पहचान के लिए करेगी, जहां तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है। खेत स्तर पर किए जाने वाले इस आकलन से फसलों को हुए नुकसान की मात्रा और किसानों तथा ग्रामीण समुदायों को सहायता देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जरूरत का भी पता लगाने में मदद मिलेगी।
अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में बारिश की स्थिति और पानी की उपलब्धता पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया गया है। यदि पानी की कमी की स्थिति गंभीर होती है, तो पेयजल, चारे और अन्य जरूरी जरूरतों से जुड़े उपाय तत्काल आधार पर किए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री का यह निर्देश महाराष्ट्र में बारिश के असमान वितरण को लेकर बढ़ती चिंता के बीच आया है। मानसून के दौरान राज्य के कुछ हिस्सों में जहां भारी बारिश हुई है, वहीं इसके बाद कई क्षेत्रों में लंबे समय तक बारिश नहीं हुई। इससे खरीफ फसल की महत्वपूर्ण बढ़वार के समय किसानों के सामने मुश्किलें पैदा हो गयी हैं।
इसी वजह से सरकार केवल बड़े क्षेत्र के औसत आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय तालुका और गांव स्तर पर आकलन पर ध्यान दे रही है। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां वास्तव में कृषि संकट की स्थिति है, ताकि वहां उचित राहत उपाय शुरू किए जा सकें।
पांच अक्टूबर से शुरू होने वाला पंचनामा अभियान बारिश से जुड़े कृषि संकट की वास्तविक स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने लाने में मदद कर सकता है। इसके निष्कर्षों के आधार पर सरकार सूखे से जुड़ी सहायता और पानी की कमी से निपटने के उपायों के संबंध में आगे के फैसले करेगी।
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