पुणे , दिसंबर 27 -- महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दो गुटों के फिर से एक होने की संभावना खत्म होने और शिवसेना (शिंदे गुट) के सत्ताधारी गठबंधन में नाराजगी को देखते हुए नगर निगम चुनावों से पहले राज्य में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिख रहे हैं।
इस पृष्ठभूमि में यह पता लगाने के लिए शुरुआती कदम उठाए जा रहे हैं कि क्या महायुति के दोनों घटक शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) मिलकर नगर निगम चुनाव लड़ सकते हैं।
अगर ऐसा कोई गठबंधन बनता है, तो इसका परिणाम तीन-कोने वाला राजनीतिक माहौल हो सकता है। एक तरफ फिर से बनी महा विकास अघाड़ी (एमवीए), दूसरी तरफ शिंदे-अजित पवार गठबंधन और फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अकेले लड़ना पड़ सकता है।
एनसीपी के दो गुटों के एक होने की संभावना के खत्म होने के बाद श्री शरद पवार के ग्रुप ने महा विकास अघाड़ी को फिर से खड़ा करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। उधर शिवसेना (शिंदे गुट) में भी नाराजगी बढ़ रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि भाजपा सम्मानजनक सीट-शेयरिंग की शर्तें स्वीकार नहीं कर रही है और शिवसेना (शिंदे गुट) को बराबर का साथी नहीं मान रही है।
यह नाराजगी तब सामने आई जब शिवसेना (शिंदे गुट) कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेता डॉ. नीलम गोरहे के घर के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया। उन पर भाजपा के कहने पर सीटें लेने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शिवसेना को कमजोर और न जीतने लायक वार्डों से समझौता करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
शिवसेना (शिंदे गुट) शहर प्रमुख रवींद्र धंगेकर ने कहा कि भाजपा ने शिवसेना को जो सीटें प्रस्तावित की हैं, वे ऐसी थीं जिन पर न तो भाजपा और न ही शिवसेना पहले कभी जीती थी। ऐसे गठबंधन का क्या मतलब है? श्री धंगेकर ने इस बात पर जोर देते हुए कि नगर निगम चुनाव जमीनी स्तर पर लड़े जाते हैं, अगर पार्टी कार्यकर्ताओं को सही सम्मान और सही मौके नहीं दिए गए, तो गठबंधन मंजूर नहीं होगा।
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