बारामती , मई 17 -- महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में आंतरिक कलह एवं संभावित विभाजन की बढ़ती अटकलों के बीच, पुणे शहर के कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप देशमुख ने रविवार को इन दावों का दृढ़ता से खंडन किया और कहा कि जब जोड़ों को बदला जाता है तो कुछ मतभेद स्वाभाविक होते हैं। उन्होंने कहा कि समय अंततः सभी चिंताओं का समाधान करेगा।

श्री देशमुख ने कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं से संबंधित हालिया पत्राचार के बाद वरिष्ठ नेताओं में असंतोष की अफवाहें तेज हो गईं। उन्होंने कहा कि कुछ रिपोर्टों में गलत तरीके से यह दावा किया गया कि पार्टी विभाजन के कगार पर है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ-साथ उन नेताओं ने भी पहले ही स्पष्टीकरण जारी कर इन दावों को खारिज कर दिया है, जिनके नाम कथित असंतोष से जोड़े गए थे।

उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन के बाद उत्पन्न हुए भावनात्मक प्रभाव का उल्लेख करते हुए श्री देशमुख ने कहा कि न केवल पार्टी कार्यकर्ता बल्कि वरिष्ठ नेता और शुभचिंतक भी अभी तक इस सदमे से उबर नहीं पाए हैं। उन्होंने विपक्षी दलों और मीडिया के कुछ वर्गों पर पार्टी के बारे में गलत धारणाएं फैलाकर स्थिति का फायदा उठाने का आरोप लगाया। लेकिन उन्होंने बल देकर कहा कि पार्टी सदस्य संगठन को मजबूत करने के लिए सामूहिक रूप से और कुशलतापूर्वक काम करना जारी रखेंगे।

श्री देशमुख ने उन खबरों को भी खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया था कि पार्टी के अनुभवी नेताओं को दरकिनार करके संगठनात्मक नियंत्रण सांसद पार्थ पवार और जय पवार को सौंपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को जिम्मेदारियां सौंपना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और इसका मतलब वरिष्ठ नेताओं को कमजोर करना नहीं है। उन्होंने कहा कि युवा नेताओं का उत्साह और नए विचार, वरिष्ठ सदस्यों के अनुभव के साथ मिलकर, पार्टी को और मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं।

श्री शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी गुट और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बीच संभावित विलय को लेकर फिर से उठ रही अटकलों पर श्री देशमुख ने टिप्पणी करते हुए इन खबरों को 'बेबुनियाद' बताते हुए खारिज कर दिया। हाल ही में मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि श्री शरद पवार गुट के नेताओं ने पुणे में गुप्त बैठक कर विलय पर चर्चा की थी। श्री देशमुख ने ऐसी खबरों का मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि दोनों पक्षों के नेताओं द्वारा एकतरफा आयोजित बैठकें निरर्थक होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल विलय को लेकर कोई चर्चा नहीं चल रही है और यह मुद्दा फिलहाल ठंडे बस्ते में है।

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