पिंपरी , अक्टूबर 18 -- महाराष्ट्र के चिंचवड़ में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महिला सम्मेलन में विद्वानों ने महिला नेतृत्व, बौद्ध धर्म में महिलाओं के ऐतिहासिक योगदान, वैश्विक भिक्खुनी परंपरा, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देने तथा एक समावेशी समाज के निर्माण में बौद्ध मूल्यों की भूमिका पर चर्चा की।
इस सम्मेलन में लगभग 1,000 बौद्ध अनुयायियों ने भाग लिया। इसका आयोजन डॉ. उज्ज्वला अंडुरकर, डॉ. संध्या हरिभक्त, डॉ. वैशाली भामरे और लक्ष्मीकांत माने ने 'विजडम इन मोशन', 'कैटलिस्ट फाउंडेशन' और 'डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट' (बीएआरटीआई) के सहयोग से किया।
यह सम्मेलन प्रोफेसर रामकृष्ण मोरे सभागार में आयोजित किया गया, जिसमें भारत और विदेशों से बौद्ध भिक्खुनियां, विद्वान, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों की महिलाएं शामिल हुईं।
मुख्य अतिथि और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता प्रोफेसर विमल थोराट ने युवा पीढ़ी, विशेषकर 'जेन जेड' से आह्वान किया कि वे गौतम बुद्ध और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने शिक्षित होने के आंबेडकर के आह्वान को गंभीरता से लिया है और वे एक नयी शिक्षित पीढ़ी तैयार करने की दिशा में काम कर रही हैं।
मिलिंद कॉलेज की प्रधानाचार्य और विशेष अतिथि डॉ. वैशाली प्रधान ने बोधगया महाविहार को बौद्धों को सौंपने की मांग की। उन्होंने इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार से राज्य में एक स्वतंत्र 'पाली विश्वविद्यालय' स्थापित करने की पहल करने का आग्रह किया। उन्होंने आयोजकों को अगला सम्मेलन डॉ. आंबेडकर द्वारा स्थापित 'मिलिंद कॉलेज' में आयोजित करने के लिए भी आमंत्रित किया।
प्रोफेसर मनोरी पी. सेनानायके ने सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी के बौद्ध मूल्यों पर बात की, जिसमें उन्होंने 'बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय' के सिद्धांतों पर जोर दिया।
भिक्खुनी महाकासा ने कोरियाई भिक्खुनी संघ की प्रेरणादायक वैश्विक भूमिका पर एक वीडियो संदेश प्रस्तुत किया। डॉ. रूपाली भामरे मून ने विदेशों में आंबेडकरवादी विचारों के प्रसार और इसमें भारतीय समुदाय की भूमिका पर चर्चा की, जबकि भिक्खुनी विसुद्धिपन्ना ने युद्ध से शांति की ओर बढ़ने की प्रक्रिया में वियतनामी बौद्ध भिक्खुनियों के योगदान के बारे में बात की। डॉ. योजना भगत ने शिलालेखों के माध्यम से बौद्ध महिलाओं की ऐतिहासिक यात्रा का विश्लेषण किया।
डॉ. नीलम ओसवाल ने मानसिक स्वास्थ्य पर आयोजित एक सत्र में बौद्ध दर्शन के जरिए तनाव, चिंता और मानसिक परेशानियों से निपटने के तरीकों पर चर्चा की।
अभिनेत्री चिन्मयी सुमित ने आंबेडकरवादी विचारों को अपनाने की अपनी यात्रा साझा की। उन्होंने आंबेडकर के दर्शन को केवल एक विचारधारा नहीं बल्कि जीवन जीने का एक तरीका बताया। उन्होंने यह भी बताया कि आंबेडकर की मां की भूमिका के बारे में जानने का उनके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा।
श्रीलंका की भिक्खुनी उप्पलवन्ना थेरी, तिब्बती बौद्ध नन द्रुपोन ग्यालत्सेन समतेन, भंते सुनीति भिक्खुनी और भिक्खुनी शाक्य धम्मदिन्ना ने अपने अनुभव साझा किए और महिलाओं के मठवासी समुदाय की यात्रा पर चर्चा की।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित