मुंबई , जून 16 -- महाराष्ट्र सरकार ने नगर परिषदों, नगर पंचायतों और नगर निगमों के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को बड़ी राहत देते हुए आरक्षित सीटों से चुनाव जीतने वाले सदस्यों को अपनी जाति वैधता प्रमाणपत्र जमा करने के लिए छह महीने की और मोहलत दी है।

सरकार का यह फैसला एक बार के लिए ही मान्य होगा, जिससे अयोग्य ठहराये जाने की कगार पर खड़े सैकड़ों सदस्यों की कुर्सी बच गयी है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया है। यह फैसला उन प्रक्रियात्मक देरी को दूर करने के लिए लिया गया है, जिसने आरक्षित सीटों पर चुने गये उम्मीदवारों के प्रमाणपत्र जमा करने की प्रक्रिया को बाधित किया था। पिछले साल 21 दिसंबर 2025 को हुए चुनावों में निर्वाचित उम्मीदवारों के लिए तय की गयी छह महीने की शुरुआती समयसीमा 20 जून को समाप्त होने वाली थी। राज्य सरकार ने इस ढील के पीछे की मुख्य वजह प्रशासनिक अड़चनों को बताया है।

आधिकारिक सूत्रों ने इस देरी की वजह जाति जांच समितियों के पास बढ़ते बैकलॉग के साथ-साथ कर्मचारियों की भारी कमी और मौजूदा जनगणना संबंधी कार्यों में प्रशासनिक कर्मियों की तैनाती को बताया है। इन वजहों से सत्यापन प्रक्रिया काफी धीमी हो गयी है, विशेष रूप से सतर्कता सेल द्वारा की जाने वाली जमीनी स्तर की जांच, जिसमें विद्यालय और घर जाकर की जाने वाली आवश्यक जांच शामिल है।

कैबिनेट ने इस बात पर ध्यान दिया कि इन व्यवस्थागत देरी के कारण कई उम्मीदवार अपने प्रयासों के बावजूद निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने में असमर्थ रहे हैं।

कैबिनेट के निर्देशानुसार, निर्वाचित प्रतिनिधियों की सदस्यता की रक्षा करने और स्थानीय स्वशासी निकायों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए इस विस्तार को 'विशेष मामले' के रूप में देखा जायेगा।

इस विस्तार के संबंध में औपचारिक अधिसूचना जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। एक बार सरकारी आदेश आधिकारिक रूप से अधिसूचित हो जाने के बाद नयी समयसीमा प्रभावी रूप से छह महीने के लिए बढ़ जायेगी। इससे उम्मीदवारों को अनिवार्य सत्यापन औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मिल जायेगा। इस फैसले से बड़ी संख्या में पार्षदों को राहत मिलेगी।

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