मुंबई , जून 16 -- महाराष्ट्र सरकार ने ग्रामीण आजीविका एवं महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं के स्वयं-सहायता समूहों (एसएचजी)को सरकारी खाली पड़ी ज़मीन पट्टे पर देने की एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है।

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने घोषणा किया कि इस नई नीति के अंतर्गत, पात्र महिला स्वयं-सहायता समूहों को राजस्व विभाग की खाली ज़मीन का एक हेक्टेयर (लगभग 2.5 एकड़) हिस्सा पांच साल के पट्टे पर दिया जाएगा। इसके अलावा, हर एसएचजी को उत्पादक गतिविधियां शुरू करने के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी।

इस पहल का मुख्य उद्देशय बंजर और अवैध कब्ज़े वाली सरकारी ज़मीन का सही उपयोग करना और साथ ही ग्रामीण महिलाओं के लिए सतत रोज़गार के अवसर उत्पन्न करना है। एसएचजी इस ज़मीन का उपयोग चारे की खेती, बांस लगाने, नेपियर घास उगाने या घास के मैदान विकसित करने के लिए कर सकते हैं।

हर ग्रुप के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता जिला योजना समिति या ज़िला खनिज फ़ाउंडेशन निधि से दी जाएगी। यह कार्यक्रम स्थानीय तहसीलदारों की देखरेख में चलेगा और तालुका स्तर पर बनी खास कमेटियां इसके विकास पर नज़र रखेंगी और तकनीकी मार्गदर्शन देंगी। कृषि विभाग उत्पादन प्रबंधन एवं परियोजना को लागू करने में भी मदद करेगा।

संभावित आर्थिक फ़ायदों पर बात करते हुए, मंत्री बावनकुले ने कहा कि इस परियोजना से हर एसएचजी को सालाना चार से पांच लाख रुपये की कमाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि इन मुनाफ़ों पर सरकार का कोई हक़ नहीं होगा जिससे महिला समूह अपनी पूरी कमाई अपने पास रख सकेंगी।

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