मुंबई , अगस्त 29 -- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद महाराष्ट्र सरकार ने आदिवासी छात्र संगठनों की सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है।

आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए पुणे, नागपुर और नासिक में अनशन पर बैठे छात्रों से अपना आंदोलन तुरंत वापस लेने और पढ़ाई पर लौटने की अपील की है।

यह समझौता पुणे के मांजरी क्षेत्र में आदिवासी छात्रों द्वारा पिछले 16-17 दिनों से किए जा रहे लंबे आंदोलन के बाद हुआ है, जहां अनशनकारियों का स्वास्थ्य बिगड़ने से प्रशासन पर लगातार दबाव बढ़ रहा था।

बैठक में आरक्षण के पदानुक्रम को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री ने एक विशेष समिति को 2017 के सरकारी निर्णय के अनुसार अनुसूचित जनजाति को उपयुक्त स्थान सुनिश्चित करने के लिए तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, पेसा भर्ती ढांचे की समीक्षा करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया कि 17 में से 9 जॉब कैडर पहले ही भरे जा चुके हैं और बाकी बचे पदों पर तुरंत भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

उच्चतम न्यायालय के जुलाई 2021 के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए प्रशासन ने आदिवासी उम्मीदवारों के लिए निर्धारित क्षमताओं को अंतिम रूप देने के लिए तीन महीने की समय सीमा तय की है, जिसके बाद अगले छह महीनों के भीतर पूरी भर्ती प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी। इसके अलावा, सरकारी और सहायता प्राप्त आवासीय आश्रम शालाओं में खराब बुनियादी ढांचे और लचर व्यवस्थाओं की शिकायतों से निपटने के लिए अधिकारियों ने तीसरे पक्ष से स्वतंत्र ऑडिट कराने का फैसला किया है। इसमें किसी भी तरह की प्रशासनिक या ढांचागत लापरवाही पाए जाने पर तुरंत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

नीतियों के सुचारू क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए मंत्री अशोक उइके ने बताया कि मुख्यमंत्री फडणवीस खुद तीन महीने बाद छात्र प्रतिनिधियों के साथ एक समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें ज़मीनी प्रगति का आकलन किया जाएगा।

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