मुंबई , अक्टूबर 17 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महाराष्ट्र में अवैध रूप से महिलाओं के शरीर से अंडाणु निकालने और बेचने वाले एक बड़े रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है।
एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि ईडी ने महाराष्ट्र में बदलापुर, उल्हासनगर, नासिक और बारामती सहित राज्य में 11 ठिकानों पर छापेमारी की है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि एक आर्थिक रूप से कमजोर पीड़ित महिला को बहला-फुसलाकर कम से कम 33 बार एग रिट्रीवल (अंडाणु निकालने) की गंभीर और जोखिमभरी प्रक्रिया से गुजारा गया।
एजेंसी ने इस दौरान एजेंटों, प्रजनन केंद्र और अन्य चिकित्सा संस्थानों से जुड़े वित्तीय लेन-देन का पता लगाया। ईडी ने गिरफ्तार एजेंटों, अस्पतालों और प्रजनन केंद्रों से जुड़ी जगहों की तलाशी ली, जिन पर इन प्रक्रियाओं में मदद करने का संदेह है। उल्हासनगर में शिविर 4 के 'दहा चाल' इलाके में स्थित सुभाष टेकरी में छापेमारी की गयी। यह जगह गिरफ्तार एजेंट मंजूषा वानखेड़े से जुड़ी है।
आरोप है कि वानखेड़े इन प्रक्रियाओं के लिए महिलाओं का इंतजाम करती थी, उनके आने-जाने की व्यवस्था करती थी और बिना जरूरी डॉक्टर की पर्ची के स्थानीय केंद्रों पर उनकी सोनोग्राफी करवाती थी। एक अन्य गिरफ्तार एजेंट अश्विनी रूपेश चाबुकस्वार से जुड़ी जगहों पर भी छापेमारी की गयी। इसके अलावा एजेंसी ने उल्हासनगर में 'भगवानदास सोनोग्राफी' की भी तलाशी ली। इससे पहले मार्च 2026 में उल्हासनगर नगर निगम ने नियमों के उल्लंघन के आरोप में शहर के 'भगवान अस्पताल' स्थित सोनोग्राफी केंद्र पर छापा मारकर उसे सील कर दिया था। बदलापुर में एक अवैध टेस्ट ट्यूब बेबी (आईवीएफ) केंद्र भी जांच के दायरे में आया है।
ईडी ने नासिक में एक आईवीएफ केंद्र और उसके निदेशक के घर एवं कार्यालय की तलाशी ली। इस सिलसिले में निदेशक अभी न्यायिक हिरासत में हैं। जांचकर्ताओं ने आरोपियों और बिचौलियों से जुड़ी अन्य जगहों की भी तलाशी ली। इस दौरान महिलाओं और एजेंटों को दिये गये पैसों के लेन-देन और चिकित्सा संस्थानों से जुड़े वित्तीय व्यवहार की जांच की गयी। यह कार्रवाई बदलापुर पुलिस की जांच के बाद की गयी है। पुलिस ने मई 2026 में एक आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को काम पर रखा गया और उन्हें पैसे देने का लालच देकर बार-बार 'एग-रिट्रीवल' (अंडे निकालने की) प्रक्रिया से गुजरने के लिए राजी किया गया। आरोपों के अनुसार इन महिलाओं को हर साइकिल के लिए 25,000 से 30,000 रुपये मिलते थे।
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