मुंबई , मार्च 16 -- महाराष्ट्र विधानसभा के चल रहे बजट सत्र में 'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026' पेश किए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
विधेयक पर विधानसभा में तीन दिनों की बहस तय हो गया है। राज्य सरकार ने ज़ोर-ज़बरदस्ती, दबाव या प्रलोभन के ज़रिए होने वाले धार्मिक धर्मांतरण को रोकने के लिए यह विधेयक पेश किया है। इस कानून की मांग भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक एवं मंत्री नितेश राणे ने ज़ोर-शोर से उठाई थी। अगर यह विधेयक पास हो जाता है, तो महाराष्ट्र भारत का 13वां ऐसा राज्य बन जाएगा जहाँ इस तरह का कानून लागू होगा।
कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने इस विधेयक का विरोध करते हुए इस कानून के पीछे की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विधेयक को धर्मों के बीच दरार पैदा करने और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने के मकसद से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस विधेयक को केवल राजनीतिक फ़ायदे और अपने वोट बैंक को मज़बूत करने के लिए ला रही है। उन्होंने मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक हालात में ऐसे कानून की ज़रूरत पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस विभाजनकारी कानून के मुकाबले कहीं ज़्यादा ज़रूरी मुद्दे हैं, जिन पर ध्यान देने की ज़रूरत है।
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