नयी दिल्ली , फरवरी 09 -- महाराष्ट्र के टडोबा टाइगर कॉरिडोर में एक निजी कंपनी की खनन परियोजना को राज्य सरकार की मंजूरी का मुद्दा राज्यसभा में उठाते हुए शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार से उसे नामंजूर करने का अनुरोध किया।
श्रीमती चतुर्वेदी ने सदन में सोमवार को शून्यकाल के दौरान कहा कि टडोबा टाइगर कॉरिडोर में खनन के लिए एक निजी कंपनी के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए राज्य के वन्यजीव बोर्ड ने तीन सदस्यीय समिति बनायी थी। समिति ने अपनी सिफारिश में कहा था कि इससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होगी और इंसानों तथा बाघों के बीच संघर्ष बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि अपनी ही विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को दरकिनार करते हुए राज्य वन्यजीव बोर्ड ने परियोजना को मंजूरी प्रदान कर दी है और केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए अपनी सिफारिश भेजी है।
श्रीमती चतुर्वेदी ने कहा कि इस परियोजना से 35 हेक्टेयर भूमि पर 18 हजार पेड़ गिराये जायेंगे। देश के चार हजार बाघों में से 250 प्रभावित होंगे। सीधे तौर पर 60 अधिक बाघ और दूसरे जीवों का आवास समाप्त हो जायेगा और 650 गांवों में इंसानों और बाघों के बीच संघर्ष बढ़ेगा। उन्होंने केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से अपील की इस परियोजना को मंजूरी न दी जाये।
उनसे पहले मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति ने विरासत स्थलों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनके संरक्षण के लिए भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण को नीति बनानी चाहिये।
हरियाणा से भाजपा से सुभाष बराला ने राज्य के 18 जिलों में भूजल में आर्सेनिक की उच्च मात्रा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे कैंसर, हृदय रोग, चर्म रोग और बच्चों में मानसिक विकार के मामले बढ़ रहे हैं। मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से इसके लिए ठोस कदम उठाने की मांग की और इससे निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं में सहयोग की अपील की।
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