सुलतानपुर , सितंबर 13 -- गणेशोत्सव मूल रूप से महाराष्ट्र की संस्कृति से जुड़ा है। गणेशोत्सव की नींव भले ही वर्षों पूर्व पड़ी हो किंतु पिछले करीब एक दशक से यह पर्व उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों सहित सुलतानपुर जिले में व्यापक स्तर पर मनाया जाने लगा हैं, अब तो यहां भी मुंबई की तर्ज पर लोग घरों में मूर्ति स्थापना कर समारोहपूर्वक विसर्जन करते हैं। सुलतानपुर में इस बार महाराष्ट्र के पुणे व मुंबई के दिवा से मूर्ति लेकर पंडाल वा घरों में सजा रहे हैं।
सुलतानपुर में पूजा महोत्सव की संचालन समिति केंद्रीय पूजा व्यवस्था समिति के महामंत्री सुनील कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ साल पहले एक- दो मूर्ति शहर में स्थापित होती थी। इसलिए कोई खास व्यवस्था भी नहीं बनानी पड़ती थी किन्तु पिछले एक दशक से गणपति की स्थापना का प्रचलन बहुत तेजी से बढ़ा है। अब तो सैकड़ों मूर्तियां घरो में स्थापित और बाजे गाजे के साथ आदि गंगा गोमती के घाट पर विसर्जित होती हैं। इस कारण जिला प्रशासन और पूजा समिति को पूरी व्यवस्था बनानी पड़ती है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष गणपति बप्पा की प्रतिमाएं शहर के पंडालों में पहुंचनी शुरू हो गई हैं। शनिवार कई पंडालों व घरों में प्रतिमाएं लाई गईं हैं। सोमवार को गणेश चतुर्थी पावन अवसर पर मूर्ति स्थापना का अनुष्ठान संपन्न होगा। यहां दस दिनों तक विशेष कार्यक्रम होंगे। इस दौरान जगह-जगह भक्तों के लिए भंडारे भी लगाए जाएंगे।
शहर के चौक स्थित मेजरगंज में इस बार गणेशोत्सव खास मनाने की तैयारी है। शनिवार को यहां पहली बार महाराष्ट्र के पुणे के प्रसिद्ध श्रीमंत दगडूसेठ हलवाई गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित की गई है। भक्त गाजे-बाजे के साथ प्रतिमा को पंडाल तक लाए। इस दौरान उनके साथ जेसीबी भी थी। गभड़िया ओवर ब्रिज से प्रतिमा लाते समय जाम लग गया था।
14 सितंबर से शुरू होने वाले इस उत्सव के लिए श्री प्रथम गणेश पूजा समिति ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। 10 दिन तक चलने वाले महोत्सव के लिए शनिवार को पंडाल सजकर तैयार हो गए हैं। उन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस उत्सव में मराठी समाज के लोग भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। समिति के अध्यक्ष सिद्धू काले ने बताया कि पांच फीट की प्रतिमा पुणे से खास तौर पर मंगाई गई है। इस प्रतिमा की लागत 45 हजार रुपये है। प्रतिदिन सुबह नौ बजे और शाम आठ बजे पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और पूजा की व्यवस्था की गई है। समिति ने शहरवासियों से परिवार सहित पहुंचकर गणपति बप्पा के दर्शन करने की अपील की है।
महाराष्ट्र के बालकृष्ण पुजारी साल 1970 में व्यापार के लिए सुल्तानपुर आए थे। उन्होंने यहां सराफा कारोबार शुरू किया। कारोबार बढ़ने पर उन्होंने महाराष्ट्र से दूसरे लोगों को भी यहां बुलाया। साल 1974 में उन्होंने शहर के मेजरगंज में पहली बार गणेश उत्सव मनाया गया था। इसी के साथ श्री प्रथम गणेश पूजा समिति की नींव रखी गई। बालकृष्ण पुजारी इस समिति के संस्थापक हैं। अब शहर के राहुल चौराहा, शास्त्री नगर, विवेक नगर, गोलाघाट और दूसरे कई स्थानों पर करीव दर्जन भर गणपति की प्रतिमाएं रखी जाती हैं।
इसके अलावा इस बार गोराबारिक अमहट निवासी मीरा देवी ने बताया कि वह करीब देश दशक से गणपति की मूर्ति पूजा कर रही है। आठ साल पहले उनके देवर जयप्रकाश मुंबई के साइन में गणपति रखते थे, उनकी शादी नहीं हुई थी इसलिए वह ही अपने पति के साथ स्थापना और विसर्जन की पूजा करने जाती थी। 2012 के दो तीन वर्ष बाद गणपति में बहुत सुना सुना लगता था तो बच्चों ने अपने हाथ से मूर्ति बनाई और स्थापना कर दी। फिर बाजार से लाकर लगातार गणेशोत्सव घर में मना रहे हैं। इस बार मुंबई के दिवा से गणेश जी की मूर्ति लाकर स्थापित किए है। दस दिन के कार्यक्रम के बाद सीता कुंड घाट पर प्रतिमा विसर्जित की जाएगी।
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