मुंबई , जुलाई 08 -- एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा-एसपी) अध्यक्ष शरद पवार ने बुधवार को विधान भवन में महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर आयोजित उच्चस्तरीय समिति की बैठक में भाग लिया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई यह बैठक उच्चतम न्यायालय में आगामी सुनवाई के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

विधानमंडल सत्र के दौरान विधान भवन में श्री पवार की यह उपस्थिति 1996 के बाद पहली बार हुई, जिसने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया। श्री जयंत पाटिल, श्री जितेंद्र आव्हाड और श्री रोहित पाटिल सहित पार्टी नेताओं एवं विधायकों ने श्री पवार का गर्मजोशी से स्वागत किया।

बैठक में न्यायिक कार्यवाही से पहले राज्य की कानूनी तैयारियों, रणनीतिक रुख और सीमा विवाद के बदलते घटनाक्रम पर मुख्य रूप से चर्चा हुई। बैठक में श्री फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, केंद्रीय मंत्री नारायण राणे और राकांपा-एसपी के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे के अलावा समिति के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

शिवसेना (यूबीटी) पार्टी के किसी प्रतिनिधि की अनुपस्थिति राजनीतिक हलकों में चर्चा का मुख्य विषय बनी रही।

दशकों पुराना यह विवाद 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम से जुड़ा है, जब बेलगावी, कारवार और निपानी सहित 865 मराठी भाषी गांवों को तत्कालीन मैसूर राज्य (अब कर्नाटक) में शामिल कर दिया गया था। इस कदम का महाराष्ट्र के लगातार विरोध करने के कारण 1966 में महाजन आयोग की नियुक्ति की गयी थी। महाराष्ट्र ने महाजन आयोग की उस रिपोर्ट को अन्यायपूर्ण बताते हुए खारिज कर दिया था, जिसमें प्रमुख सीमावर्ती शहरों को कर्नाटक में ही रखने की सिफारिश की गयी थी। दशकों के विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक गतिरोध के बाद महाराष्ट्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत 2004 में सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया।कानूनी लड़ाई के अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचने के साथ, राज्य सरकार भाषाई जनसांख्यिकी और भौगोलिक निकटता के आधार पर अपने तर्कों को मजबूत करने का लक्ष्य बना रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा आंदोलन में श्री पवार का दशकों का अनुभव राज्य की कानूनी टीम को काफी मजबूती प्रदान कर सकता है।

उच्चतम न्यायालय की आगामी सुनवाई के मद्देनजर सभी की निगाहें इस कानूनी कार्यवाही पर टिकी हैं और सीमावर्ती क्षेत्र के हजारों मराठी भाषी निवासियों की उम्मीदें अपने पक्ष में फैसले पर लगी हुई हैं।

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