मुंबई , जुलाई 21 -- महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय तूफान खड़ा हो गया जब किसान नेता और एमएलसी सदाभाऊ खोत ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले में विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों एवं उम्मीदवारों पर तीखा ज़ुबानी हमला करते हुए उन्हें "आतंकवादी" करार दिया।

श्री खोत ने अपने भड़काऊ बयानों में सरकार से लोकतांत्रिक तरीकों से इन प्रदर्शनकारियों को कुचलने की मांग की थी। इन बयानों की न केवल विपक्ष ने कड़ी निंदा की है बल्कि सत्ताधारी गठबंधन के भीतर भी मतभेद उत्पन्न हो गए हैं।

श्री खोत ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की बढ़ती मांगों के बीच ज़ोरदार तरीके से उनका बचाव किया। श्री खोत ने एक गहरी साज़िश का आरोप लगाते हुए कहा कि परीक्षा में हुई गड़बड़ियों से श्री प्रधान का कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने विपक्षी इंडिया गठबंधन और महाविकास अघाड़ी पर आरोप लगाया कि वे इस आंदोलन की आड़ में इसका उपयोग राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अराजकता फैलाने के लिए कर रहे हैं। श्री खोत ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं से जुड़े कुछ सोशल मीडिया हैंडल आम युवाओं को भड़काकर बनावटी अशांति फैलाने के लिए आग में घी डालने का काम कर रहे हैं।

एक विवादित नारा "केंद्र में नरेंद्र, राज्य में देवेंद्र, और शिक्षा में धर्मेंद्र" गढ़ते हुए श्री खोत ने दावा किया कि चल रहे प्रदर्शन आतंक जैसी स्थितियों को दर्शाते हैं जो देश को अस्थिर करने के लिए आयोजित किए गए हैं।

इन टिप्पणियों का तुरंत उल्टा असर हुआ है और इसने राजनीतिक विरोधियों और सहयोगियों सभी को एकजुट होकर तीखी प्रतिक्रिया देने पर मजबूर कर दिया है।सत्ताधारी गठबंधन से अलग राय रखते हुए, शिवसेना एमएलसी बच्चू कडू ने श्री खोत के बयानों को गैर-जिम्मेदाराना एवं खतरनाक बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि स्थानीय युवाओं एवं प्रदर्शनकारी छात्रों को आतंकवादी करार देने के गंभीर राष्ट्रीय परिणाम हो सकते हैं और श्री कडू ने साफ तौर पर मांग की कि इन बयानों को तुरंत वापस लिया जाए।

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