नासिक , अगस्त 31 -- महाराष्ट्र में नासिक जिले के लासलगांव स्थित एक गोदाम में बड़ी मात्रा में प्याज सड़ने की रिपोर्टों के बाद सरकार के बफर स्टॉक प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं।

केंद्र सरकार ने मूल्य स्थिरता कोष (पीएसएफ) के तहत 15 मई से 'नेफेड' और 'एनसीसीएफ' के जरिये बड़े पैमाने पर प्याज खरीद का अभियान शुरू किया था।

इस पहल का उद्देश्य प्याज की कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को रोकना और आवश्यकता पड़ने पर बाजार में बफर स्टॉक जारी करना था। ऐसे में लासलगांव में जमा स्टॉक का एक हिस्सा खराब होने से भंडारण की स्थितियों और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गये हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लासलगांव-मनमाड रोड स्थित 'सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन' (सीडब्ल्यूसी) के गोदाम में रखा काफी प्याज सड़ चुका है और कई बोरियों में कीड़े पड़ गए हैं। इससे निकल रहे काले, बदबूदार तरल पदार्थ और उठती दुर्गंध के कारण आसपास के निवासियों का जीना मुहाल हो गया है।

कीमतों को नियंत्रित करने के लिए खरीदे गये इतने बड़े स्टॉक के खराब होने से सरकारी भंडारण सुविधाओं और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्याज जैसी जल्द खराब होने वाली फसल के लिए उचित तापमान, वेंटिलेशन और नियमित निगरानी जरूरी है। किसी भी लापरवाही से बड़े पैमाने पर बर्बादी और सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हो सकता है।

साढ़े तीन महीने चले अभियान के तहत 1,235 से 2,345 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करीब 1.20 लाख टन प्याज खरीदा गया था, जिसे नासिक जिले के अलग-अलग गोदामों में रखा गया था।

देश की प्रमुख प्याज मंडियों में से एक, लासलगांव के स्थानीय किसानों और व्यापारियों ने आशंका जतायी है कि सरकारी स्टॉक के कुप्रबंधन से बाजार पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने जमा प्याज की नियमित जांच और इस बर्बादी के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की है।

मूल्य-वृद्धि के समय उपभोक्ताओं को राहत देने और बाजार में स्थिरता लाने के लिए यह बफर स्टॉक बनाया गया था, लेकिन भंडारण में ही प्याज सड़ने से इस नीति का मूल उद्देश्य विफल हो सकता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, प्याज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए वैज्ञानिक रख-रखाव, नमी से बचाव, पर्याप्त वेंटिलेशन और शुरुआती स्तर पर ही सड़ने वाले प्याज को छांटना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि सरकार को बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री के साथ-साथ भंडारण के बुनियादी ढांचे पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए।

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