मुंबई , सितंबर 01 -- ओबीसी कार्यकर्ता लक्ष्मण हाके और उनके समर्थकों ने आरक्षण अधिकारों की रक्षा के लिए दौंड तालुका के पाटस क्षेत्र से मुंबई के लिए मंगलवार को पैदल मार्च शुरू किया, लेकिन पुलिस ने पाटस टोल प्लाजा के पास ही जुलूस रोक दिया और प्रदर्शनकारियों को मुंबई नहीं जाने दिया।
श्री हाके ने जोर देकर कहा कि इस आंदोलन का मकसद हिंसा फैलाना नहीं, बल्कि आरक्षण की रक्षा करना है। उन्होंने राज्यभर के ओबीसी समुदाय से इस मुहिम से जुड़ने की अपील की, हालांकि रिपोर्ट यह भी है कि इस मार्च को लेकर कुछ ओबीसी नेताओं के बीच मतभेद भी सामने आये हैं।
ओबीसी समाज का यह आंदोलन ऐसे समय हो रहा है, जब मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। 29 अगस्त से अनशन पर बैठे श्री जरांगे इसे मराठा समाज की पुरानी मांगों के लिए अपनी 'अंतिम लड़ाई' बता रहे हैं।
भूख हड़ताल के तीसरे दिन श्री जरांगे का रक्तचाप और शुगर लेवल गिरने से उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम 31 अगस्त की रात जांच के लिए पहुंची थी, लेकिन श्री जरांगे ने चिकित्सीय जांच कराने से इनकार कर दिया। गिरते स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन और उनके समर्थक दोनों चिंतित हैं।
श्री जरांगे की मुख्य मांग है कि पहचाने गये 58 लाख ऐतिहासिक कुनबी दस्तावेजों के आधार पर योग्य मराठों को तुरंत कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी किये जायें। कुनबी पहचान मिलने से मराठा समुदाय को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।
इसके साथ ही उन्होंने 'सगे-सोयरे' (रक्त संबंधी) अधिसूचना को लागू करने और मराठवाड़ा के लिए हैदराबाद गजट समेत सतारा, कोल्हापुर और औंध के ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर कुनबी दर्जा देने की मांग उठायी है। उन्होंने जाति सत्यापन और जांच समितियों को खत्म करने या निलंबित करने की मांग की है। उनका तर्क है कि ये समितियां प्रक्रिया में अनावश्यक रुकावटें डालती हैं, इसलिए जाति वैधता प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया तेज होनी चाहिए।
श्री जरांगे ने पिछले आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज पुलिस केस वापस लेने की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने आंदोलन में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के लिए सरकारी नौकरी और आर्थिक मुआवजे की मांग रखी है।
श्री जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार, खासकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर टालमटोल की नीति अपनाने का आरोप लगाया है। सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के रवैये पर सवाल उठाते हुए उन्होंने सरकार को मांगे पूरी करने के लिए 12 सितंबर तक की समय सीमा दी है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 12 सितंबर तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो लाखों समर्थकों के साथ मुंबई का रुख किया जायेगा और मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास 'वर्षा' या आजाद मैदान में बड़ा प्रदर्शन होगा। उन्होंने मराठा समाज से सड़कों पर उतरने की अपील की है। आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए जरांगे 'गुरिल्ला रणनीति' अपनाने की बात कह रहे हैं। 12 सितंबर के आसपास कोर कमेटी की मुंबई में होने वाली बैठक में अनिश्चितकालीन अनशन समेत अगले कदम पर फैसला लिया जायेगा।
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने कहा है कि वह कानून और संविधान के दायरे में आने वाली मांगों पर चर्चा के लिए तैयार है। कैबिनेट बैठक के बाद मंत्रियों (राधाकृष्ण विखे पाटिल, उदय सामंत और प्रसाद लाड) का एक प्रतिनिधिमंडल श्री जरांगे से वार्ता कर सकता है।अधिकारियों का कहना है कि पुराने रिकॉर्ड के आधार पर कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने का काम जारी है, लेकिन श्री जरांगे प्रशासनिक देरी को नकारते हुए मांगों को तुरंत लागू करने पर अड़े हैं।
उधर, लक्ष्मण हाके के नेतृत्व में ओबीसी वर्ग का लामबंद होना मामले को और जटिल बना रहा है। ओबीसी नेताओं का तर्क है कि बड़े पैमाने पर मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र देने से मौजूदा 29 फीसदी ओबीसी कोटे पर असर पड़ेगा और प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ जायेगी। श्री हाके का कहना है कि शिक्षा, सरकारी नौकरियों और स्थानीय निकायों में ओबीसी के हितों की सुरक्षा बेहद जरूरी है।उन्होंने श्री जरांगे पर ओबीसी अधिकारों को नुकसान पहुंचाने और जनप्रतिनिधियों पर इस मामले में चुप रहने का आरोप लगाया है।
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