पुणे , अगस्त 09 -- नासिक-पुणे सेमी-हाई-स्पीड रेलवे परियोजना के मूल मार्ग को बहाल करने की मांग को लेकर आज महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गये। आंदोलनकारियों ने क्रांति दिवस के अवसर पर कई स्थानों पर सड़क जाम किया।
सिन्नर में एमएलए सत्यजीत तांबे के नेतृत्व में समृद्धि महामार्ग पर गोंदे फाटा के पास विरोध प्रदर्शन किया गया। जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को एक्सप्रेसवे की ओर बढ़ने से रोकने की कोशिश की तो स्थिति तनावपूर्ण हो गयी और दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की हुई।
इसके बाद स्थिति पर नियंत्रण पाने के प्रयास में पुलिस ने श्री तांबे को हिरासत में ले लिया। बाद में प्रदर्शनकारियों ने समृद्धि महामार्ग को अवरुद्ध करने का प्रयास किया, जबकि उनमें से कुछ ने पुलिस वाहन को रोकने की भी कोशिश की, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा हो गयी।
लगभग 16,000 करोड़ रुपये की लागत वाली पुणे-नासिक सेमी-हाई-स्पीड रेल परियोजना के तहत मूल रूप से पुणे, चाकण, राजगुरुनगर, मंचर, नारायणगांव, आलेफाटा, संगमनेर, सिन्नर और नासिक को जोड़ने वाले मार्ग की परिकल्पना की गयी थी।
वहीं रेल मंत्रालय ने जुन्नर के नारायणगांव में स्थित 'जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप' (जीएमआरटी) सुविधा में संभावित व्यवधान की चिंताओं का हवाला देते हुए एक वैकल्पिक मार्ग का परीक्षण करने का निर्णय लिया है।
प्रस्तावित नये विकल्प के तहत नासिक-शिर्डी-पुंतंबा और अहिल्यानगर-चाकण से होकर गुजरने वाले मार्गों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। इस बदलाव का खेड, आंबेगांव, जुन्नर, संगमनेर और सिन्नर के निवासी विरोध कर रहे है, जिनका तर्क है कि मूल मार्ग से इस क्षेत्र को अधिक लाभ होगा।
चाकण से सिन्नर तक आज रास्ता रोको आंदोलन आयोजित किया गया। जुन्नर में सांसद अमोल कोल्हे ने आंदोलन का नेतृत्व किया, जबकि पूर्व मंत्री बालासाहेब थोरात ने संगमनेर के हिवरगांव पावसातोल प्लाजा पर प्रदर्शन की अगुवाई की।
सिन्नर में प्रदर्शन के दौरान मंत्री गिरीश महाजन ने श्री तांबे से फोन पर बात की। इससे पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी विधायक से चर्चा की थी।
परियोजना के तकनीकी पहलुओं की जांच के लिए परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है। रेलवे बोर्ड के प्रतिनिधि और संभागीय आयुक्त भी इस पैनल का हिस्सा हैं।
श्री महाजन ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि समिति की सिफारिशों और जनसुनवाई के संबंध में एक सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जायेगा और समिति का कार्यकाल नहीं बढ़ाया जायेगा।
वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मूल मार्ग बहाल होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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