मुंबई , जून 27 -- वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल को नागपुर का नया पुलिस आयुक्त नियुक्त किये जाने के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
दरअसल सोशल मीडिया पर उनका एक पुराना वीडियो सामने आया है। इसमें वे सार्वजनिक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की प्रशंसा करते दिख रहे हैं।
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब 45 सेकंड का एक वीडियो क्लिप सामने आया। इसमें श्री पाटिल 'सकल हिंदू समाज' की ओर से आयोजित 'हिंदू सम्मेलन' को संबोधित कर रहे हैं और आरएसएस तथा इसके संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार की तारीफ कर रहे हैं।
विपक्षी दल कांग्रेस ने इस पर औपचारिक विरोध दर्ज कराते हुए आईपीएस अधिकारी के भाषण की जांच की मांग की है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह भाषण अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमों का उल्लंघन है, क्योंकि सेवा नियमावली के तहत बतौर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी राजनीतिक तटस्थता बनाये रखना उनका कर्तव्य है।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने भी शनिवार को इस विवाद में कूदते हुए पुलिस अधिकारी और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार दोनों पर तीखा हमला किया। सोशल मीडिया पर विस्तृत पोस्ट में श्री ठाकरे ने पदाधिकारी के इस आचरण को 'दोहरी निष्ठा' का प्रदर्शन बताया।
श्री ठाकरे ने कहा, "बतौर पुलिस अधिकारी आपकी निष्ठा पुलिस बल के कर्तव्यों के प्रति होनी चाहिए। यदि आप संघ के प्रति इतना गहरा लगाव महसूस करते हैं तो आपको अपनी सेवा से इस्तीफा दे देना चाहिए और आधिकारिक तौर पर आरएसएस या भाजपा में शामिल हो जाना चाहिए।"उन्होंने सरकार की चुप्पी की भी आलोचना की और कहा कि उनकी निष्क्रियता पदाधिकारी के आचरण को मौन स्वीकृति देने जैसी है।
श्री ठाकरे ने 2012 की एक घटना का भी जिक्र किया, जब मनसे के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान तत्कालीन सरकार ने एक कांस्टेबल को सिर्फ उन्हें बधाई देने के लिए अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया था। उन्होंने वर्तमान प्रशासन को यह स्पष्ट करने की चुनौती दी कि क्या वे श्री पाटिल पर भी 'निष्पक्षता' के वही मानक लागू करेंगे।
इसके अलावा मनसे प्रमुख ने पदाधिकारी की वर्दी पर भी तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे 'पुलिस बल के खाकी रंग' को आरएसएस से जुड़ी पारंपरिक 'खाकी हाफ पैंट' के साथ मिला दिया गया है।
जहां एक ओर विपक्ष और आलोचक लगातार जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, वहीं श्री पाटिल ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है और कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। पदाधिकारी के करीबी सूत्रों ने अनौपचारिक रूप से उनका बचाव करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम में कई सार्वजनिक हस्तियां शामिल हुई थीं और ऐसे आयोजनों में जाना सामान्य जनसंपर्क का हिस्सा है।
महाराष्ट्र सरकार ने नागपुर के नवनियुक्त पुलिस कमिश्नर के इस आचरण के संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
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