मुंबई , मई 03 -- टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के नासिक बीपीओ में कथित यौन उत्पीड़न और धार्मिक धर्मांतरण के लिए दबाव डालने के मामले की मुख्य आरोपी निदा खान बॉम्बे उच्च न्यायालय का रुख करेंगी। उनके वकील ने आज यहां बताया कि वे सत्र न्यायालय के जमानत याचिका नामंजूर किये जाने के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।
वकीलों ने कहा कि उन्होंने आदेश की सर्टिफाइड प्रति के लिए आवेदन कर दिया है और जैसे ही वह प्राप्त होगी, वे जमानत के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करेंगे। निदा खान इस मामले की एकमात्र ऐसी आरोपी हैं, जिनकी गिरफ्तारी अभी बाकी है। नासिक सत्र न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केजी जोशी ने दो मई को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
निदा खान ने अपने वकील राहुल कासलीवाल और बाबा सैयद के माध्यम से अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। उन्होंने गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग करते हुए तर्क दिया कि उन पर लगायी गयी धाराओं में सात साल से कम की सजा का प्रावधान है। साथ ही यह भी दलील दी गयी है कि वह स्वयं एक महिला हैं, ऐसे में वह किसी दूसरी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने में कैसे शामिल हो सकती हैं?अदालत में यह भी तर्क दिया गया कि वह वर्तमान में गर्भवती हैं और पुलिस जांच में पूरा सहयोग करेंगी। उनके वकीलों ने आगे दलील दी कि यदि आरोपों को सच मान भी लिया जाए तो भी महाराष्ट्र में धर्मांतरण के खिलाफ कोई कानून नहीं है और अधिकतम उन पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मुकदमा चलाया जा सकता है।
नासिक स्थित टीसीएस के बीपीओ कार्यालय में काम करने वाली निदा खान उन आठ आरोपियों में से एक हैं, जिनके खिलाफ नासिक शहर पुलिस ने 26 मार्च से तीन अप्रैल के बीच कथित यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण के संबंध में नौ प्राथमिकी दर्ज की हैं।
मामले के अन्य आरोपी कर्मचारियों दानिश शेख, शफी शेख, आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तार, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन और अश्विनी चैनानी को पहले ही हिरासत में लिया जा चुका है।
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