मुंबई , जून 11 -- महाराष्ट्र सरकार ने पारंपरिक मिट्टी शिल्प क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से एक बड़ा नीतिगत कदम उठाते हुए राज्य भर के कुम्हारों, मूर्तिकारों और ईंट-निर्माताओं को मुफ्त कच्चा माल उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने घोषणा की कि इस नई योजना के तहत, पंजीकृत कारीगरों को सालाना 700 ब्रास तक मिट्टी और आवश्यक रेत मुफ्त में दी जाएगी। इस कदम का उद्देश्य पारंपरिक शिल्पकारों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करना और उनकी आजीविका को सुरक्षित करना है। एक ब्रास का आशय 100 घन फीट से है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह नीति समुदाय की लगातार उठ रही मांगों और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा किए गए वादों के बाद तैयार की गई है। इस अनूठी पहल को मध्य प्रदेश में पहले से चल रही सफल नीतियों की तर्ज पर तैयार किया गया है।

योजना में पारदर्शिता और सही वितरण सुनिश्चित करने के लिए राजस्व विभाग कुम्हार परिवारों के लिए एक विशेष पंजीकरण अभियान चलाएगा, जिसके तहत उन्हें समर्पित पहचान पत्र जारी किए जाएंगे। इन दस्तावेजों की मदद से कारीगर निर्धारित स्थलों, जैसे कि सीपेज टैंक, जल संरक्षण तालाबों और अन्य चिन्हित क्षेत्रों से आसानी से मिट्टी प्राप्त कर सकेंगे।

इसके अलावा, सरकार ने मिट्टी निकालने के लिए विशिष्ट 'क्लस्टर' (समूह) बनाने का भी निर्देश दिया है, ताकि यह पूरी प्रक्रिया सुव्यवस्थित रहे और स्थानीय नियमों का उल्लंघन न हो।

महाराष्ट्र का मिट्टी शिल्प क्षेत्र, जो मिट्टी के बर्तन, दीये, ईंटें और धार्मिक त्योहारों के लिए मूर्तियां बनाता है, लंबे समय से आधुनिक और बड़े पैमाने पर बनने वाले प्लास्टिक व चीनी मिट्टी के उत्पादों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है।

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