नांदेड़ , मई 03 -- महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद अशोक चव्हाण ने केंद्र सरकार से नांदेड़ रेलवे मंडल को मुंबई मुख्यालय वाले मध्य रेलवे में शामिल करने की मांग की है। उन्होंने इसके पीछे प्रशासनिक और भौगोलिक कारणों का हवाला दिया है।
यह मांग दक्षिण तटीय रेलवे के नए जोन के गठन की प्रक्रिया के बीच उठाई गयी है। श्री चव्हाण ने इस संबंध में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी फोन पर विस्तृत चर्चा की है।
उन्होंने कहा कि नांदेड़ मंडल को सिकंदराबाद मुख्यालय वाले दक्षिण मध्य रेलवे के अधीन बनाए रखना न तो भौगोलिक दृष्टि से उचित है और न ही प्रशासनिक रूप से तर्कसंगत।
उन्होंने बताया कि नये रेलवे जोन के गठन के बाद दक्षिण मध्य रेलवे के छह मंडलों में से तीन मंडलों को नए जोन में स्थानांतरित किए जाने की संभावना है, जबकि नांदेड़ सहित शेष तीन मंडलों को सिकंदराबाद के अधीन रखने का प्रस्ताव है। श्री चव्हाण ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसकी समीक्षा की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिण मध्य रेलवे के अधीन रहने के कारण नांदेड़ मंडल लगातार उपेक्षा का शिकार रहा है। उनके अनुसार फ्लाईओवर, सबवे और स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में देरी हुई है।
श्री चव्हाण ने यह भी दावा किया कि रेलगाड़ियों की समय-सारिणी मुख्य रूप से तेलंगाना के यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर बनाई जाती है, जिससे महाराष्ट्र के यात्रियों को असुविधा होती है।
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा कई वर्षों से लंबित है और मौजूदा पुनर्गठन इस समस्या के समाधान का उपयुक्त अवसर प्रदान करता है।
वर्तमान में महाराष्ट्र के प्रमुख रेलवे मंडल, जिनमें मुंबई, पुणे, सोलापुर, भुसावल और नागपुर शामिल हैं, मध्य रेलवे के अंतर्गत आते हैं, जबकि केवल नांदेड़ मंडल ही सिकंदराबाद स्थित दक्षिण मध्य रेलवे के अधीन है। श्री चव्हाण ने इसे भौगोलिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से विसंगतिपूर्ण बताया।
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