नागपुर , जुलाई 28 -- महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में तीन किसानों ने खेती में हुए नुकसान के कारण अलग-अलग घटनाओं में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि बढ़ता कर्ज, लगातार फसल खराब होना और वित्तीय संकट इन आत्मघाती कदमों के मुख्य कारण बताए जा रहे हैं।

मृतकों की पहचान यवतमाल जिले के भाम गांव निवासी राजू चुड्डुलके (49), भंडारा जिले के बोथली गांव निवासी उमेश बागमारे (37) और अमरावती जिले के तरोड़ा (डोमक) गांव निवासी पवन भाकरे (45) के रूप में हुई है।

यवतमाल के रालेगांव तालुका के भाम गांव निवासी चुड्डुलके के पास मुधापुर उजड़ में 1.39 हेक्टेयर कृषि भूमि थी और उन पर फसल कर्ज बकाया था। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि उन्हें सरकार की कृषि ऋण माफी योजना से बड़ी उम्मीदें थीं। वह 25 जुलाई को वह लाभार्थियों की सूची देखने रालेगांव स्थित सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक की शाखा गए थे। कथित तौर पर सूची में अपना नाम न पाकर वह बेहद हताश होकर घर लौटे और उसी रात करीब 10 बजे अपने आवास पर जहरीला पदार्थ खा लिया।

एक अन्य घटना में, भंडारा जिले के लाखंदूर तालुका के बोथली गांव के किसान उमेश बागमारे ने रविवार को फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में लगातार फसल खराब होने से उन पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा था। उनके पास तीन एकड़ कृषि भूमि थी और वे पिछले कई दिनों से भारी मानसिक तनाव में थे।

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