लखनऊ , जून 20 -- बेहतर नागरिक सुविधाएं मुहैया कराने के लिए नगर निगमों को सशक्त बनाने की पहल की गई है। प्रदेश के सभी 17 महापौरों से उनके शहरों की रिपोर्ट कार्ड तैयार कराने की तैयारी है। इसके लिए 24 जून को लखनऊ में बुलाई गई बैठक में प्रदेश के सभी 17 महापौर मंथन करेंगे।
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बैठक में किस-किस अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता है, आय के किन स्थायी स्रोतों को चिह्नित करना चाहिए, उस पर भी विचार किया जाएगा। महापौरों से मांगी गई कई जानकारियों से नगर निगम की सक्रियता पर भी सवाल खड़े होंगे।
उन्होंने बताया कि बैठक के लिए महापौरों को सुझाव देने के लिए एक प्रोफार्मा भी भेजा गया है। इसमें पेयजल, सफाई, कूड़ा निस्तारण, स्ट्रीट लाइट और कर की दर में संशोधन से लेकर शहर में अनुपलब्ध तंत्र में की उपलब्धता समेत कई अन्य जानकारी मांगी गई है।
अधिकारियों के मुताबिक इसके साथ ही, शहर के सुधार के लिए सुझाव भी देने के लिए कहा गया है। महापौरों को यह भी जानकारी देनी होगी कि उनके निकाय में कार्यकारिणी समिति का गठन हुआ है या नहीं। पेयजल व्यवस्था, सफाई, कूड़ा निस्तारण, स्ट्रीट लाइट जैसी सेवाओं का सार्वजनिक निजी सहभागिता मॉडल यानी पीपीपी लागू किया गया है या नहीं। इन सेवाओं को पीपीपी मॉडल पर लागू किया गया है तो इसके परिणाम में और कर कलेक्शन के बारे में भी बताना होगा। इसके अलावा, इन सेवाओं में सुधार के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए, इसकी भी जानकारी देनी है।
महापौरों को 2023-24 से अब तक किए गए कार्यों की जानकारी भी देनी होगी। बच्चों की स्थिति और बड़ों की स्थिति समेत 25 में कितना खर्च किया गया, इसकी भी जानकारी देनी है। साथ ही भविष्य में आय के संसाधनों को लेकर सुझाव भी मांगे गए हैं। अगर इसकी जानकारी नहीं दी गई तो संशोधन अधिनियम 2025 के प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
नगर निकाय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में निकायों को विभिन्न प्रस्ताव जैसे कर और फीस की दरों में संशोधन आदि के लिए शासन का पूर्व अनुमोदन लेना पड़ता है। यह अनुमोदन समय से मिलता है या फिर विलंब से प्राप्त होता है। यह भी सुझाव देना होगा कि क्या पूर्व में कठिनाइयां आती हैं। आपदा प्रबंधन, डिजास्टर मैनेजमेंट आदि के संसाधनों में वृद्धि के लिए नए गठन की जानकारी भी मांगी गई है।
जानकारी के अनुसार लखनऊ में 24 जून को होगी महापौरों की बैठक होगी ।जिसमें सभी 17 महापौर शामिल होंगे।इसको लेकर वित्त आयोग ने सुझाव के साथ-साथ कठिनाइयों की भी जानकारी मांगी है ।
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