भोपाल , जून 30 -- मध्यप्रदेश सरकार ने लगभग एक दशक से लंबित शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सभी विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। हालांकि सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।
सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने सोमवार को अपर मुख्य सचिवों, विभागाध्यक्षों और कलेक्टरों को पत्र जारी कर महाधिवक्ता की कानूनी राय के आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 से संबंधित लंबित याचिकाओं के बीच उठाया गया है।
विभाग के अनुसार वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन की कानूनी राय में कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने पदोन्नति नियम-2025 पर कोई अंतरिम स्थगन आदेश नहीं दिया है। पूर्व में सरकार द्वारा सुनवाई के दौरान दिया गया आश्वासन न्यायालय के आदेश का हिस्सा नहीं था। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों में राज्य सरकार अपने वैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है।
कानूनी राय में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विभागीय पदोन्नति समितियां (डीपीसी) गठित कर पदोन्नतियां दी जा सकती हैं, लेकिन ये सभी पदोन्नतियां उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन होंगी। भविष्य में न्यायालय का निर्णय भिन्न होने की स्थिति में उसी के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने अपने पक्ष में कहा है कि लंबे समय से पदोन्नति नहीं होने के कारण अनेक उच्च पद रिक्त हैं और कई विभाग लगभग 40 प्रतिशत स्वीकृत क्षमता पर कार्य कर रहे हैं। इससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने के साथ निचले पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी बाधित हो रही है। जनहित को देखते हुए पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करना आवश्यक है।
जीएडी के निर्देश के बाद सभी विभाग विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठकें आयोजित करने की तैयारी शुरू कर सकते हैं। इससे लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत मिलने की संभावना है।
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