मोतिहारी , फरवरी 27 -- महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के मीडिया अध्ययन विभाग ने "संसदीय रिपोर्टिंग" विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में पत्रकारिता एवं जनसंचार के छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिताकी। कार्यक्रम के संरक्षक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव रहे, जबकि अध्यक्षता मीडिया अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अंजनी कुमार झा ने की। इस अवसर पर विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सकेत रमन भी उपस्थित रहे।
डॉ. सकेत रमन ने कहा कि आज के दौर में मीडिया विद्यार्थियों के लिए संसदीय प्रक्रिया की समझ अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, "ऐसी कार्यशालाएं छात्रों को जिम्मेदार, तथ्यात्मक और विश्लेषणात्मक पत्रकारिता के लिए तैयार करती हैं।"कार्यशाला की मुख्य वक्ता याशिका केडिया, प्रोग्राम एसोसिएट, पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च, नई दिल्ली रही। उन्होंने संसदीय रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा करते हुए संसद की कार्यप्रणाली, विधायी प्रक्रिया,लोकसभा और राज्यसभा की भूमिका तथा 'संसद में एक दिन' की कार्यवाही को चरणबद्ध तरीके से समझाया। उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों का उदाहरण प्रस्तुत कर उनका विश्लेषण किया और विद्यार्थियों के साथ विस्तृत संवाद किया। इस दौरान विधेयकों के उद्देश्य, पृष्ठभूमि, सामाजिक प्रभाव तथा मीडिया में उनकी संतुलित और तथ्यपरक प्रस्तुति पर विशेष जोर दिया गया।
याशिका केडिया ने कहा, "संसदीय रिपोर्टिंग केवल सदन की कार्यवाही को कवर करना नहीं है, बल्कि उसके पीछे की प्रक्रिया, संदर्भ और प्रभाव को समझकर जनता तक पहुंचाना है। संसद में एक दिन कैसे संचालित होता है और विधेयक आम लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं, इसे समझना बेहद जरूरी है।"कार्यक्रम के संयोजक डॉ. मयंक भारद्वाज ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि ऐसी शैक्षणिक गतिविधियों का उद्देश्य छात्रों को संसदीय पत्रकारिता की व्यावहारिक समझ प्रदान करना तथा नीति और कानून से जुड़े मुद्दों पर उनकी आलोचनात्मक दृष्टि विकसित करना है।
कार्यशाला के अंत में प्रश्न-उत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने संसदीय प्रक्रिया, विधायी शोध और रिपोर्टिंग से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में आयोजन समिति एवं मीडिया अध्ययन विभाग के शिक्षकों डॉ. परमात्मा कुमार मिश्र, डॉ. सुनील दीपक घोडके तथा डॉ. उमा यादव का सराहनीय योगदान रहा।
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