मथुरा , अगस्त 25 -- महाकुंभ के बजट और आयोजनों पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथों लेते हुए साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि ऐसे लोग 'विघ्न-संतोषी' हैं।
वृंदावन वात्सल्य ग्राम में आयोजित 'रक्षा सूत्र यात्रा' और रजत जयंती समारोह के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए साध्वी ऋतंभरा ने रक्षाबंधन, महाकुंभ के आयोजन और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं पर खुलकर विचार व्यक्त किए। उन्होंने देशवासियों से एकजुट होकर सनातन संस्कृति के संरक्षण और देश की सीमाओं की सुरक्षा का संदेश दिया।
उन्होने कहा कि कुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे भारत की आध्यात्मिक शक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। कुंभ में सभी संप्रदाय एकजुट होते हैं और सामाजिक भेदभाव व भ्रम की दीवारें ध्वस्त होती हैं। 12 वर्षों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा एकत्रित करने वाले ऐसे भव्य आयोजनों पर यदि अरबों रुपये भी खर्च होते हैं, तो वह कीमत बहुत छोटी है।
साध्वी ऋतंभरा ने बताया कि देश की रक्षा में तैनात जवानों के लिए 'रक्षा सूत्र यात्रा' के तहत ढाई लाख राखियां एकत्रित हुई हैं, जबकि प्रारंभिक संकल्प सवा लाख राखियों का था। उन्होंने कहा कि पूरे भारतवर्ष से आई ये राखियां देश के हर बॉर्डर और सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचाई जाएंगी। देश की बेटियां स्वयं सीमाओं पर जाकर वीर जवानों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधेंगी।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के हर बच्चे को विद्यालय, चिकित्सा और अच्छे संस्कार मिलना बेहद जरूरी है। हालांकि, धार्मिक आयोजनों के बजट पर सवाल उठाने वालों को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि यदि देश में घोटाले और भ्रष्टाचार बंद हो जाएं तथा अमानत में खयानत न की जाए, तो पूरे भारत में खुशहाली आ सकती है।
भारतीय उत्सवों पर आपत्ति जताने वालों पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि भारत गणपति उत्सव, दुर्गा पूजा, नवरात्रि, रामनवमी और दीपावली जैसे सभी पर्व पूरे उत्साह और परंपरा के साथ मनाएगा। जिन्हें देश की सांस्कृतिक परंपराओं से समस्या है, उन्हें भारत में रहने के बजाय सीमा पार चले जाना चाहिए।
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