, Aug. 30 -- महराजगंज 30 अगस्त वार्ता। पैसे के मामूली लेनदेन का विवाद इतना खूनी रूप ले लेगा, यह किसी ने सोचा भी नहीं था। रोहुआ चौराहा पुल के पास सरेराह मेवालाल की बेरहमी से पीट-पीटकर की गई हत्या के मामले में अब पुलिसिया कार्रवाई की सुस्त चाल पर सवाल खड़े होने लगे हैं। महज 400 रुपये की उधारी ने हंसते-खेलते परिवार की खुशियां सदा के लिए छीन लीं। गोनहा गांव के सतुअहवा टोला निवासी मेवालाल प्रजापति (38) की निर्मम पिटाई और गला दबाकर की गई हत्या के बाद रविवार को भी पूरे गांव में सन्नाटा है। पत्नी राजमती और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। मासूम 7 साल का बेटा अंश अब भी इस बात से अनजान है कि मिट्टी में जान फूंकने वाले उसके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।
घटना बीते शनिवार (29 अगस्त 2026) की शाम करीब 5 बजे की है। ग्राम गोनहां सेतुअहवा टोला (थाना पनियरा, जनपद महराजगंज) निवासी मेवालाल अपने सात वर्षीय मासूम बेटे अंश और दामाद दिलीप प्रजापति के साथ बाजार करने के लिए निकले थे। जैसे ही वे रोहुआ चौराहा के पास पहुंचे, पूर्व से घात लगाए बैठे रामकेश निषाद (पुत्र रामविलास निषाद, निवासी रोहुआ, थाना गुलरिहा) ने पैसे के लेनदेन को लेकर विवाद शुरू कर दिया। देखते ही देखते आरोपी ने जान से मारने की नीयत से मेवालाल को पकड़ लिया और ताबड़तोड़ हमला कर दिया। सात साल का मासूम बच्चा रोता-बिलखता रहा, लेकिन आरोपी का दिल नहीं पसीजा।
घटना की सूचना मिलते ही बदहवास हालत में मेवालाल की पत्नी राजमति देवी मौके की ओर दौड़ीं। जब वे शिकायत करने रामकेश के घर पहुंचीं, तो आरोप है कि आरोपी की पत्नी ने उन पर भी हमला कर दिया। जब तक परिजन और स्थानीय लोग मेवालाल के पास पहुंचते, तब तक अत्यधिक पिटाई और चोटों के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी। पीड़ित राजमति देवी ने थानाध्यक्ष गुलरिहा (गोरखपुर) को तहरीर देकर आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
पनियरा थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह के अनुसार, वारदात का मुख्य स्थल गोरखपुर जिले के गुलरिहा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। हालांकि, घटना की सूचना पर डायल-112 पुलिस मौके पर पहुंची थी और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
मेवालाल अपने परिवार के अकेले कमाने वाले सदस्य थे। वे चाक पर मिट्टी के बर्तन बनाकर और गांव-गांव जाकर उन्हें बेचकर अपने परिवार का पेट पालते थे। उनके कुम्हारी के हुनर से ही दो बेटियों के हाथ पीले हो चुके थे, जबकि दो अविवाहित बेटियों की परवरिश और छोटे बेटे अंश की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर थी। अब मेवालाल की बेवक्त मौत के बाद पूरे परिवार के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बिलखती पत्नी राजमती बार-बार एक ही सवाल पूछ रही हैं, "महज 400 रुपये के लिए मेरे पति की जान ले ली, अब इन मासूम बच्चों को कौन संभालेगा?" ग्रामीण प्रशासन से आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ बेसहारा हुए इस परिवार को आर्थिक मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
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