श्रीनगर , मार्च 25 -- पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख एवं जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और हुर्रियत अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने बुधवार को दिल्ली की एक अदालत द्वारा प्रतिबंधित 'दुखतरान-ए-मिल्लत' की प्रमुख आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा सुनाने पर पुनर्विचार करने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को 2018 के कश्मीर अलगाववादी साजिश मामले के संबंध में प्रतिबंधित संगठन के तीन सदस्यों को सजा सुनाई। अदालत ने अंद्राबी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि उनके सहयोगियों सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को 30 साल के कारावास के साथ जुर्माने की सजा दी गई। इन तीनों को जुलाई 2018 में एनआईए ने गिरफ्तार किया था।

सुश्री मुफ्ती ने यहां पार्टी मुख्यालय में वृक्षारोपण अभियान शुरू करने के बाद पत्रकारों से कहा कि हालांकि उनके अंद्राबी और उनकी राजनीति के साथ मतभेद हैं, लेकिन जेल में बिताये गये उनके वर्षों को देखते हुए इस मुद्दे पर सहानुभूति के साथ विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारी उनकी विचारधारा और उनके काम करने के तरीके से मतभेद हैं, लेकिन मानवता का तकाजा है कि चूंकि वह एक वृद्ध महिला हैं और पहले ही कई साल जेल में बिता चुकी हैं, इसलिए उनकी सजा पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।"पीडीपी प्रमुख ने उम्रकैद के उस प्रावधान पर भी सवाल उठाए जिसमें व्यक्ति को शेष जीवन तक जेल में रहना पड़ता है और कहा कि पूरे देश में इस पर पुनर्विचार होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि आजीवन कारावास को पहले की तरह माना जाना चाहिए, जब इसका प्रभावी अर्थ 14 साल की सजा होता था। उन्होंने कहा कि भारत सरकार कई कैदियों को पैरोल (अस्थाई रिहाई) पर रिहा करती रही है और इस मामले में भी, यदि आवश्यक हो तो शर्तों के साथ, इसी तरह की राहत पर विचार किया जाना चाहिए।

मीरवाइज ने भी कहा कि अंद्राबी और दो अन्य महिलाओं को दी गई सजा चिंता का विषय है।

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