पटना , मई 26 -- मृद्ध कला-संस्कृति, पर्यावरणीय विविधता एवं ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों पर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अनोखी पहल की है, जिसके तहत शासकीय पदाधिकारी और कर्मचारी हर तीन महीने के अंतराल पर पर्यटन स्थलों पर परिवार समेत दो दिन का प्रवास करेंगे। पदाधिकारी और कर्मचारी पर्यटन स्थलों के फोटोग्राफ्स, जानकारी एवं अपने अनुभवों का प्रतिवेदन स्थल पदास्थापन जिला के जिला पदाधिकारी को सौपेंगे। जिसके बाद उक्त क्षेत्र में पर्यटन, ईको पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाएगा।

सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, पुलिस महानिदेशक, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, प्रमंडलीय आयुक्त, आरक्षी महानिरीक्षक, आरक्षी उप महानिरीक्षक, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक के साथ-साथ दूसरे कई पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सरकारी पदाधिकारी और कर्मचारी गृह जिला छोड़कर किसी भी जिले के पर्यटन क्षेत्र में सपरिवार दो दिन का प्रवास करेंगे। प्रवास के दौरान पदाधिकारी-कमर्चारी कम से कम तीन स्थलों का भ्रमण और रात्रि विश्राम करेंगे। इस दौरान ये सभी पदाधिकारी व कर्मचारी विभागीय निरीक्षण या समीक्षा बैठक से दूर रहेंगे।

अपर मुख्य सचिव ने पत्र में कहा है कि प्रवास के दौरान पदाधिकारी और कर्मचारियों से प्राप्त प्रतिवेदनों को पर्यटन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ-साथ कला एवं संस्कृति विभाग को भेजा जाएगा। इस दौरान पर्यटन विभाग, जिला पदाधिकारी एवं वन प्रमंडल पदाधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि पर्यटन क्षेत्र में होम-स्टे के विकास की दिशा में काम करेंगे, जिससे स्थानीय निवासी के घर में भुगतान के आधार पर पर्यटक ठहराव कर सकें। इससे स्थानीय अर्थवस्था को जहां मजबूती मिलेगी वहीं पर्यटकों को प्रमाणिक, गहन सांस्कृतिक अनुभव के साथ स्थानीय भोजन, व्यक्तिगत आतिथ्य, सत्कार आदि का अनुभव प्राप्त हो सकेगा।

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