नैनीताल , जुलाई 10 -- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मसूरी के 49 होटलों द्वारा कथित पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन के मामले में उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूकेपीसीबी) को छह सप्ताह के भीतर ताजा अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

अधिकरण ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि सभी होटल वैध कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) के साथ ही संचालित हों और पर्यावरणीय मानकों का पूर्ण पालन करें।

एनजीटी की प्रधान पीठ के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ के समक्ष मंगलवार को सुनवाई के दौरान यूकेपीसीबी ने बताया कि 19 होटलों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अंतिम रूप से लगा दी गई है। इनमें से कई होटलों ने आदेश के खिलाफ अपील दायर की है, जबकि कुछ ने अभी तक क्षतिपूर्ति राशि जमा नहीं की है। केवल कुछ होटलों ने ही निर्धारित राशि का भुगतान किया है। इस फैसले की प्रति शुक्रवार को मिली।

बोर्ड ने अधिकरण को बताया कि शेष 30 होटलों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से 12 होटलों पर भी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगा दी गई है, जबकि बाकी 18 होटलों के विरुद्ध कार्रवाई अंतिम चरण में है। बोर्ड ने भरोसा दिलाया कि इन मामलों में चार सप्ताह के भीतर अंतिम आदेश जारी कर दिए जाएंगे।

सुनवाई के दौरान एनजीटी ने यूकेपीसीबी से 49 होटलों के कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन बोर्ड स्पष्ट जवाब नहीं दे सका। इस पर अधिकरण ने निर्देश दिया कि सभी होटल केवल वैध सीटीओ के साथ ही संचालित हों और लागू पर्यावरणीय नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए। एनजीटी ने यूकेपीसीबी को निर्देश दिया है कि वह छह सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करे। इस रिपोर्ट में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की कार्यवाही, क्षतिपूर्ति राशि की वसूली, लंबित मामलों के निस्तारण और सभी 49 होटलों के सीटीओ की मौजूदा स्थिति का विवरण शामिल किया जाए।

मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित की गई है।

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