नैनीताल , अक्टूबर 08 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मसूरी स्थित कब्रिस्तान (वक्फ संख्या 434) से जुड़ी याचिका को निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ता को वक्फ ट्रिब्यूनल जाने की छूट दी है। साथ ही अदालत ने दो सप्ताह तक संबंधित संपत्ति की प्रकृति के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने अंजुमन इस्लामिया कमेटी की ओर से दायर याचिका पर विगत पांच अक्टूबर को यह आदेश पारित किया लेकिन आदेश की प्रति गुरुवार को उपलब्ध हुई।

याचिका में कहा गया कि मसूरी शहर में एक कब्रिस्तान है और राज्य सरकार उस संपत्ति की प्रकृति बदलने का प्रयास कर रही है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की कि प्रतिवादियों को कब्रिस्तान के मौजूदा स्वरूप, चरित्र और स्थिति को बनाए रखने तथा संपत्ति पर आगे कोई कार्रवाई न करने का निर्देश दिया जाए। प्रतिवादियों को आगे किसी भी तरह के ध्वस्तीकरण, बेदखली, खुदाई, निर्माण, बदलाव या अतिक्रमण से रोका जाए।

यह भी मांग की गयी कि 11 जून 2026 के नोटिस को निरस्त किया जाए और वक्फ संपत्ति पर की गई तोड़फोड़ को अवैध घोषित किया जाए। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पैरवी की।

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने दलील दी कि याचिकाकर्ता जिस विवाद को उठा रहा है, उसका निस्तारण वक्फ अधिनियम की धारा 83 के तहत केवल वक्फ ट्रिब्यूनल ही कर सकता है।

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