नागपुर , सितंबर 06 -- महाराष्ट्र सरकार के मराठा-कुनबी समुदाय को ओबीसी का दर्जा देने के फैसले के खिलाफ ओबीसी संगठनों ने अक्टूबर में नागपुर में एक बड़ा विरोध-मार्च निकालने की योजना की घोषणा की है।

कांग्रेस विधायक दल के नेता और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमुख विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अंतिम आदेश जारी करने से पहले सरकारी प्रस्ताव के मसौदे की भाषा बदल दी है। उनके अनुसार मसौदे में कुनबी प्रमाण पत्र के लिए 'पात्र' व्यक्तियों का उल्लेख था लेकिन अंतिम संस्करण में इस शब्द को हटा दिया गया। श्री वडेट्टीवार का तर्क है कि इस बदलाव से मराठों को ओबीसी आरक्षण ढांचे में शामिल करने में आसानी हो सकती है और पारंपरिक ओबीसी समुदायों के अधिकारों पर बुरा असर पड़ सकता है।

उन्होंने घोषणा की कि आंदोलन का समन्वय करने और नागपुर में प्रस्तावित मार्च आयोजित करने के लिए प्रमुख ओबीसी नेताओं की 25 सदस्यीय समिति बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि विभिन्न ओबीसी संगठनों के नेताओं ने ओबीसी श्रेणी के तहत मराठा समुदाय को आरक्षण का लाभ देने का कड़ा विरोध किया है। उनके अनुसार सरकार के फैसले से ओबीसी के लिए उपलब्ध अवसर और कम हो सकते हैं क्योंकि उन्हें पहले से ही आरक्षण लाभों में कमी का सामना करना पड़ रहा है।

श्री वडेट्टीवार ने इस कदम के दीर्घकालिक प्रभाव पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि मौजूदा कोटा ढांचे में और लोगों को शामिल करने से ओबीसी समुदायों के अधिकार कम हो सकते हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से जुड़े ओबीसी संगठनों और व्यक्तियों से इस अभियान के समर्थन में एकजुट होने की अपील की। कांग्रेस नेता ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोगों पर इसके वैचारिक प्रभाव से ओबीसी आरक्षण की सुरक्षा कमजोर हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि ओबीसी को मिलने वाले राजनीतिक आरक्षण को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं।

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