जालना , सितंबर 04 -- महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने वरिष्ठ मंत्री छगन भुजबल के बयानों और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से जुड़े उनके रुख पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि अपने राजनीतिक फायदे के लिए वे ओबीसी मुद्दे का इस्तेमाल कर रहे हैं।
गौरतलब है कि श्री भुजबल ने राज्य सरकार की मराठा आरक्षण उप-समिति के फैसले पर नाराजगी जतायी है।
श्री जरांगे ने श्री भुजबल पर निशाना साधते हुए कहा कि मंत्री को मराठा समुदाय की मांगों का विरोध करने की बजाय अपने राजनीतिक भविष्य और 'अपने भतीजे को सांसद कैसे बनाया जाये' पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि श्री भुजबल ने राजनीतिक फायदे के लिए ओबीसी मुद्दे का इस्तेमाल किया है।
श्री जरांगे अभी अंतरवाली सराटी में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनकी मांगों में मराठा समुदाय के उन सदस्यों के लिए जाति प्रमाण पत्र की मांग भी शामिल है जिनके कुनबी रिकॉर्ड मिले हैं।
राज्य के मंत्रियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनकी मांगें मान ली हैं लेकिन श्री जरांगे ने साफ कर दिया है कि जब तक फैसलों को लागू नहीं किया जाता, तब तक वे अपना अनशन खत्म नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि श्री भुजबल कभी 'महा विकास अघाड़ी' का हिस्सा थे, बाद में 'महायुति' में शामिल हो गये और श्री अजित पवार के साथ भी जुड़ गये।
श्री जरांगे ने कहा, "ओबीसी अब समझ गए हैं कि श्री भुजबल ने क्या किया है। वे देख रहे हैं कि कैसे वह हालात के हिसाब से राजनीतिक पाला बदलते हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि श्री भुजबल ओबीसी समुदाय के हितों की रक्षा करने में नाकाम रहे हैं और दावा किया कि मंत्री का राजनीतिक पतन हो रहा है।
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