बालोद , सितंबर 15 -- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में डौंडी वन परिक्षेत्र के मरदेल गांव से करीब 500 मीटर दूर भालू छोड़े जाने को लेकर ग्रामीणों और वन विभाग के बीच सोमवार देर रात विवाद की स्थिति बन गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बालोद वन परिक्षेत्र के रानीमाई जंगल से एक अस्वस्थ भालू का रेस्क्यू कर उपचार के लिए रायपुर के जंगल सफारी भेजा गया था। उपचार के बाद स्वस्थ होने पर वन विभाग की टीम कल रात भालू को डौंडी वन परिक्षेत्र के मरदेल गांव के पास लेकर पहुंची और बस्ती से करीब 500 मीटर की दूरी पर छोड़ दिया।

इसकी जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने गांव के इतने करीब भालू छोड़े जाने से जान-माल को खतरा बताते हुए वन विभाग की टीम को रोक लिया और अधिकारियों से सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में जानकारी मांगी। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया।

घटना की सूचना मिलने पर जनपद सदस्य तुलेश्वर हिचामी भी मरदेल पहुंचे। उन्होंने डौंडी रेंजर जीवन भोंडेकर से फोन पर चर्चा की। बताया गया है कि रेंजर ने भालू को छोड़ने की जिम्मेदारी बालोद रेंजर और अन्य अधिकारियों पर डाल दी, जिससे ग्रामीण और नाराज हो गए। ग्रामीणों ने क्षेत्र के रेंजर जीवन भोंडेकर के मौके पर मौजूद नहीं होने को लेकर नाराजगी जताते हुए उनके खिलाफ नारेबाजी भी की।

इस दौरान गुरुर रेंजर चंद्रशेखर भंडारी, बालोद रेंजर सरोज कुमार और दल्लीराजहरा रेंजर संतोष ठाकुर मौके पर मौजूद थे।

स्थिति को देखते हुए बालोद वन विभाग के एसडीओ किशोरी साहू देर रात घटनास्थल पहुंचे और जनपद सदस्य तथा ग्रामीणों से चर्चा की। उन्होंने मंगलवार को पिंजरा लगाकर भालू को पकड़ने और उसे किसी अन्य स्थान पर ले जाने का लिखित आश्वासन दिया। इसके साथ ही गांव में पांच वनकर्मियों की तैनाती और किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में वन विभाग की जिम्मेदारी होने का भी आश्वासन दिया गया। इसके बाद ग्रामीणों का विरोध समाप्त हुआ।

ग्रामीणों की सुरक्षा के मद्देनजर रात में पांच वनकर्मियों सागर मंडावी, गीतेश यादव, रविशंकर निषाद, युगल किशोर सोनबरसा और रण सिंह नायक की ड्यूटी लगाई गई है। घटनास्थल पर दल्लीराजहरा थाना प्रभारी सुनील तिर्की, डौंडी थाना स्टाफ तथा वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी मौजूद रहे।

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