कोलकाता , मार्च 28 -- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को एक बार फिर महिलाओं से चुनाव के दौरान सतर्क रहने और मतदान केंद्रों पर नजर रखने की अपील की। यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग ने उनके हालिया कथित विवादित बयान पर पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है।

रघुनाथपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी के एजेंट की तरह व्यवहार करते हैं। उन्होंने मतदाताओं से कहा कि वे पैसे के प्रभाव में न आएं और मतदान से पहले बाहरी लोगों की गतिविधियों पर नजर रखें।

सुश्री ममता बनर्जी ने महिलाओं से विशेष रूप से जिम्मेदारी लेने का आह्वान करते हुए कहा, "चुनाव से एक दिन पहले से ही ध्यान रखें कि कोई बाहरी व्यक्ति क्षेत्र में प्रवेश न करे। अगर केंद्रीय बल पुलिस के वेश में बूथ कैप्चर करने आएं, तो उनका विरोध करें।"विवादित टिप्पणी में उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर महिलाएं हाथ के पंखे और बेलन जैसे घरेलू सामान अपने साथ रख सकती हैं, ताकि किसी भी गड़बड़ी का सामना किया जा सके। उन्होंने महिलाओं से मतगणना पूरी होने तक मतदान केंद्रों पर डटे रहने की अपील भी की।

यह बयान उनके 25 मार्च को दार्जिलिंग जिले के नक्सलबाड़ी में दिए गए भाषण के बाद आया है, जिसमें उन्होंने महिलाओं से बूथों की निगरानी करने और कथित तौर पर केंद्रीय बलों के दबाव का विरोध करने को कहा था।

शिकायतों के आधार पर चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और चिंता जताई है कि ऐसे बयान विशेषकर ग्रामीण इलाकों में तनाव बढ़ा सकते हैं।

हालांकि, सुश्री ममता बनर्जी ने अपने रुख का बचाव करते हुए मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कई महिलाओं के नाम, खासकर मुस्लिम मतदाताओं और शादी के बाद उपनाम बदलने वाली महिलाओं के नाम, सूची से हटाए गए हैं।

इस विवाद के चलते आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है, जबकि विपक्षी दलों ने कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है।

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