कोलकाता , अप्रैल 05 -- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के नामांकन के दौरान हुई हिंसा मामले में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह अशांति 'सुनियोजित' थी और बाहरी लोगों को लाकर इसे अंजाम दिया गया।

सुश्री ममता बनर्जी ने रविवार को मुर्शिदाबाद के जियागंज में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए भगवा खेमे पर नामांकन रैली की आड़ में जानबूझकर गड़बड़ी पैदा करने का आरोप लगाया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हुए रोड शो का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे 'नियोजित हमला' करार दिया है।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, "भवानीपुर में मेरे घर के ठीक सामने हमला किया गया। उन्होंने मेरे पोस्टरों पर थूका और स्थानीय काली मंदिर के सामने जूते दिखाये। यहां तक कि श्री अभिषेक के आवास की ओर भी जूते दिखाये गये।" उन्होंने कहा कि स्थानीय निवासियों ने इस तरह के व्यवहार का विरोध किया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "यह राजनीति नहीं है। वे नामांकन के लिए बाहर से लोग लेकर आये थे।"इस बीच, चुनाव आयोग ने इस घटना पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कथित नाराजगी के बाद, कानून-व्यवस्था बनाये रखने में विफल रहने पर चार पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। आयोग ने उनके खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिये हैं।

इससे पहले, ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में कोलकाता पुलिस के डीसी (दक्षिण मंडल 2) सिद्धार्थ दत्ता और डीसी (रिजर्व फोर्स) मानस रॉय को 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया गया था। लालबाजार स्थित पुलिस मुख्यालय में सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है ताकि झड़प में शामिल लोगों की पहचान की जा सके। सूत्रों के मुताबिक, करीब 35 से 40 व्यक्तियों को नोटिस जारी किये जा चुके हैं।

हिंसा गुरुवार को शुभेंदु अधिकारी के हाजरा क्रॉसिंग से सर्वे बिल्डिंग तक के रोड शो के दौरान भड़की थी, जब हरीश मुखर्जी रोड पर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के बीच झड़प हो गयी। स्थिति तब और बिगड़ गयी, जब तृणमूल कार्यकर्ताओं ने सिर पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

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