कोलकाता , अप्रैल 05 -- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को पश्चिम बंगाल सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य धीरे-धीरे संवैधानिक शासन से दूर होता जा रहा है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में असुरक्षित हो गया है।

श्री प्रधान ने मालदा में हुई घटना को एक बड़ी चिंता का विषय बताया। उनकी यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले भारतीय जनता पार्टी और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच आई है। गौरतलब है कि राज्य में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में विधानसभा का चुनाव होने वाला है।

झारग्राम पहुंचने के बाद श्री प्रधान ने अपनी पार्टी की संभावनाओं पर विश्वास जताते हुए कहा कि मौजूदा राजनीतिक माहौल राज्य में "डबल-इंजन" सरकार के गठन की ओर इशारा करता है। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, "बंगाल धीरे-धीरे संवैधानिक नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है। उन्होंने इसके लिए सुश्री बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उनके पास अब सुशासन सुनिश्चित करने के लिए कोई रोडमैप नहीं बचा है। इस तरह का मौजूदा समय में राज्य का प्रशासन समाज के विभिन्न वर्गों में डर, धमकियों और दबाव पर आधारित है और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।"मालदा में हाल की घटनाओं का ज़िक्र करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों की कथित घेराबंदी और उन पर हुए हमले को बिगड़ती कानून-व्यवस्था का संकेत बताया। उन्होंने कहा, "मालदा की घटना से स्थिति साफ तौर पर ज़ाहिर होती है। हालात इस हद तक बिगड़ गए कि उच्चतम न्यायालय को दखल देना पड़ा, और यहाँ तक कि सेना भी तैनात करनी पड़ी। ऐसे हालात उस राज्य में पैदा नहीं होते जहाँ कानून-व्यवस्था ठीक से काम कर रही हो। सुश्री बनर्जी के राज में बंगाल सुरक्षित नहीं है।"श्री प्रधान ने पिछले एक दशक में राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बढ़ते प्रभाव पर भी ज़ोर दिया, और संसदीय तथा विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन का हवाला दिया।

उन्होंने कहा, "भाजपा ने बंगाल से लोकसभा की कई सीटें जीती हैं और पिछली विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के तौर पर उभरी है। इस बार लोगों ने 'डबल-इंजन' वाली सरकार लाने का मन बना लिया है।" उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी 2020) को लेकर हो रही आलोचनाओं का भी जवाब दिया और कहा कि विरोधियों द्वारा उठाए गए मुद्दे बेबुनियाद हैं।

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