, April 20 -- शकील के फिल्मी सफर पर यदि एक नजर डाले तो पायेंगे कि उन्होंने सबसे ज्यादा फिल्मे संगीतकार नौशाद के साथ ही की। उनकी जोड़ी प्रसिद्ध संगीतकार नौशाद के साथ खूब जमी और उनके लिखे गाने जबर्दस्त हिट हुये। शकील बदायूंनी और नौशाद की जोड़ी वाले गीतों में कुछ है तू मेरा चांद मैं तेरी चांदनी,सुहानी रात ढल चुकी,वो दुनिया के रखवाले,मन तड़पत हरि दर्शन को,दुनिया मे हम आयें है तो जीना ही पडे़गा, दो सितारो का जमीं पे है मिलन आज की रात,मधुबन मे राधिका नाची रे,जब प्यार किया तो डरना क्या,नैन लड़ जइहें तो मन वा मे कसक होइबे करी,दिल तोड़ने वाले तुझे दिल ढूंढ रहा है,तेरे हुस्न की क्या तारीफ करू, दिलरूबा मैने तेरे प्यार में क्या क्या न किया,कोई सागर दिल को बहलाता नही प्रमुख है ।

शकील बदायूंनी को अपने गीतों के लिये तीन बार फिल्म फेयर अवार्ड से नवाजा गया। उन्हें 1960 में फिल्म चौदहवी का चांद ..के चौदहवीं का चांद हो या आफताब हो, वर्ष 1961 में फिल्म घराना..के गीत हुस्न वाले तेरा जवाब नही और 1962 में फिल्म बीस साल बाद में ..कहीं दीप जले कहीं दिल..गाने के लिये फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया।

फिल्मीं गीतों के अलावे शकील बदायूनी ने कई गायकों के लिये गजल लिखे है, जिनमे पंकज उदास प्रमुख रहे है। लगभग 54 वर्ष की उम्र में 20 अप्रैल 1970 को शकील इस दुनिया को अलविदा कह गये।

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