, April 6 -- वर्ष 1963 में ही सुचित्रा सेन की एक और सुपरहिट फिल्म ..सात पाके बांधा ..प्रदर्शित हुयी.जिसमें उन्होंने एक ऐसी युवती का किरदार निभाया, जो विवाह के बाद भी अपनी मां के प्रभाव में रहती है। इस कारण उसके वैवाहिक जीवन में दरार आ जाती है। बाद में जब उसे अपनी गलती का अहसास होता है .तब तक बहुत देर हो चुकी होती है और उसका पति उसे छोड़कर विदेश चला जाता है।इस संजीदा किरदार से सुचित्रा सेन ने दर्शकों का दिल जीत लिया। उन्हें इस फिल्म के लिए मास्को फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ फिल्म अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह फिल्म इंडस्ट्री के इतिहास में पहला मौका था, जब किसी भारतीय अभिनेत्री को विदेश में पुरस्कार मिला था। बाद में इसी कहानी पर 1974 में कोरा कागज फिल्म का निर्माण किया गया ,जिसमें सुचित्रा सेन की भूमिका को जया भादुड़ी ने रुपहले पर्दे पर साकार किया। वर्ष 1975 में सुचित्रा सेन की एक और सुपरहिट फिल्म ..आंधी.. प्रदर्शित हुयी। गुलजार निर्देशित इस फिल्म में उन्हें अभिनेता संजीव कुमार के साथ काम करने का अवसर मिला। इसमें उन्होंने एक ऐसे राजनेता की भूमिका निभाई,जो अपने पिता के प्रभाव में राजनीति में कुछ इस कदर रम गयी कि अपने पति से अलग रहने लगी। ..आंधी.. कुछ दिनों के लिये प्रतिबंधित भी कर दी गयी। बाद में जब यह प्रदर्शित हुयी तो इसने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी सफलता अर्जित की। इस फिल्म के लगभग सभी गीत उन दिनों काफी मशहूर हुये थे। इन गीतों में ..तेरे बिना जिंदगी से शिकवा तो नही .. तुम आ गये हो नूर आ गया है सदाबहार गीतों की रंणी में आते हैं।
सुचित्रा सेन के अंतिम बार वर्ष 1978 में प्रदर्शित बंगला फिल्म.. प्रणोय पाश .में अभिनय किया। इसके बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से संन्यास ले लिया और राम कृष्ण मिशन की सदस्य बन गयीं तथा सामाजिक कार्य करने लगी। वर्ष 1972 में सुचित्रा सेन को पदमश्री पुरस्कार दिया गया।अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के बीच खास पहचान बनाने वाली सुचित्रा सेन 17 जनवरी 2014 को इस दुनिया को अलविदा कह गयी।
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