, April 23 -- वर्ष 1969 में अपने दादा की रचित लघु कथा पर सत्यजीत रे ने..गूपी गायन बाघा बायन ..का निर्माण किया। फिल्म टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुयी साथ ही बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हुयी। वर्ष 1977 में सत्यजीत रे के सिने करियर की पहली हिंदी फिल्म..शतरंज के खिलाड़ी ..प्रदर्शित हुयी।संजीव कुमार, सईद जाफरी और अमजद खान की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म हालांकि टिकट खिड़की पर अपेक्षित सफलता नही अर्जित कर सकी लेकिन समीक्षको के बीच यह काफी सराही गयी। वर्ष 1978 में बर्लिन फिल्म फेस्टिबल की संचालक समिति ने सत्यजीत रे को विश्व के तीन ऑल टाइम डाइरेक्टर में एक के रूप में सम्मानित किया।
अस्सी के दशक में स्वास्क्य खराब रहने के कारण सत्यजीत रे ने फिल्मों कानिर्माण करना काफी हद तक कम कर दिया ।फिल्म ..घरे बाइरे ..के निर्माण के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ गया ।इसके बाद डाक्टर ने सत्यजीत रे को फिल्म में काम करने से मना कर दिया। लगभग पांच वर्ष तक फिल्म निर्माण से दूर रहने के बाद वर्ष 1987 में सत्यजीत रे अपने पिता सुकुमार रे पर एक वृतचित्र का निर्माण किया। सत्यजीत रे को अपने चार दशक लंबे सिने करियर में मान-सम्मान खूब मिला । उन्हें भारत सरकार की ओर से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में विभिन्न विधाओं के लिए 32 बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सत्यजीत रे वह दूसरे फिल्म कलाकार थे जिन्हें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा डाक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया।
वर्ष 1985 में सत्यजीत रे को हिंदी फिल्म उधोग के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।इसके अलावे उन्हें भारत रत्न की उपाधि से भी सम्मानित किया गया।उनके चमकदार कैरियर में एक गौरवपूर्ण नया अध्याय तब जुड़ गया जब 1992 में उनके उल्लेखनीय कैरियर को देखते हुये उन्हें ऑस्कर सम्मान से सम्मानित किया गया । सत्यजीत रे ने अपने सिने करियर में 37 फिल्मों का निर्देशन किया।वर्ष 1991 में प्रदर्शित फिल्म ..आंगतुक ..सत्यजीत रे के सिने करियर की अंतिम फिल्म साबित हुयी ।अपनी निर्मित फिल्मों से अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले महान फिल्मकार सत्यजीत रे ने 23 अप्रैल 1992 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
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