, March 9 -- फिल्म मुगले आजम के निर्माण में के. आसिफ को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा ।इसके निर्माण में लगभग 10 वर्ष लग गये जबकि सलीम अनारकली की प्रेम कहानी पर बनी एक अन्य फिल्म ..अनारकली ..प्रदर्शित होकर सुपरहिट भी हो गयी। वर्ष 1960 में जब मुगले आजम प्रदर्शित हुयी तो इसने टिकट खिडक़ी पर सारे रिकार्ड तोड़ दिये ।फिल्म का संगीत उन दिनो काफी लोकप्रिय हुआ । इस फिल्म से जुड़ा एक रोचक तथ्य यह भी है कि संगीतकार नौशाद ने फिल्म का संगीत देने से मना कर दिया था ।हुआ यूं कि के.आसिफ ने नौशाद को फिल्म का संगीत देने के लिए एक लाख रूपए का एडवांस देने की पेशकश की थी पर नौशाद ने अपनी व्यस्तता के कारण संगीत देने के प्रस्ताव ठुकरा दिया।

के.आसिफ हर कीमत पर फिल्म में नौशाद का ही संगीत चाहते थे। उन्होंने जब नौशाद को काम करने के लिए रूपयों का लालच दिया तो वह पलटकर बोले ..क्या आप समझते हैं कि पैसे से हर चीज खरीदी जा सकती है और आप हर चीज खरीद लेंगे। अपने पैसे उठाएं मैं फिल्म नहीं करंगा। इस पर आसिफ साहब ने चुटकी बजाते हुए कहा .. कैसे नहीं करेंगे .. इतने पैसे दूंगा कि आज तक किसी ने नहीं दिए होंगे।जब आसिफ साहब ने और पैसा बढ़ाने के लिए इशारा किया तो नौशाद ने गुस्से में आकर नोटों का बंडल फेंक दिया। कमरे में नोट ही नोट बिखर गए। तब उनकी पत्नी और नौकर ने सारे नोट उठाए फिर नौशाद ने कहा .. अच्छा आसिफ साहब. आप अपने पैसे अपने पास रख लीजिए हम फिल्म में काम करेंगें।

फिल्म मुगले आजम की सफलता के बाद के.आसिफ ने राजेन्द्र कुमार और सायरा बानो को लेकर ..सस्ता खून मंहगा पानी .का निर्माण कार्य शुरू किया लेकिन कुछ दिनों की शूटिंग होने के बाद उन्होंने इस फिल्म का निर्माण बंद कर दिया और गुरूदत्त और निम्मी को लेकर लैला मजनूं की कहानी पर आधारित मोहब्बत और खुदा का निर्माण कार्य आरंभ कर दिया।वर्ष 1964 में गुरूदत्त की असमय मृत्यु के बाद उन्होंने गुरूदत्त की जगह अभिनेता संजीव कुमार को काम करने का मौका दिया। लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं हुआ और 09 मार्च 1971 को दिल का दौरा पड़ने से वह इस दुनिया को अलविदा कह गये।बाद में उनकी पत्नी अख्तर के प्रयास से यह फिल्म वर्ष 1986 में प्रदर्शित हुई।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित