जालना , सितंबर 05 -- अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत मराठा समाज के लिए आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल ने गुरुवार रात से पानी और सलाइन उपचार लेना बंद कर दिया है।
श्री जरांगे का कहना है कि जब तक सरकार मराठा समाज को दिये गये आश्वासनों को लागू नहीं करती, तब तक वह कोई इलाज या खान-पान स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने के बाद ही वह चिकित्सीय उपचार शुरू करेंगे।
इलाज बंद करने के अपने फैसले की वजह बताते हुए श्री जरांगे ने कहा कि सरकार ने 58 लाख अभिलेखों की जांच प्रक्रिया शुरू करने का भरोसा दिया था, लेकिन यह काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हैदराबाद गजट की मान्यता और उसे लागू करने के संबंध में भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी है।
श्री जरांगे ने कहा कि सरकार ने गांवों में इस प्रक्रिया से जुड़ी सार्वजनिक घोषणाएं करने का वादा किया था, परंतु इस पर भी अमल नहीं हुआ है। उन्होंने हैदराबाद गजट के तहत पात्र अभिलेखों को मान्यता देने के विषय पर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि 2012 के जाति सत्यापन कानून में मराठा समाज को शामिल करने के सिलसिले में एक प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बैठक होनी थी। यह बैठक हालांकि अभी तक नहीं हो सकी है, जिससे हैदराबाद गजट का मुद्दा अधर में लटका हुआ है।
श्री जरांगे के बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई के बिना अपना आंदोलन वापस लेने से इनकार किया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित