तिरुवनंतपुरम , अप्रैल 30 -- कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य रमेश चेन्निथला ने आरोप लगाया है कि एकनिजी कंपनी ने मनियार हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना से गलत तरीके से करोड़ों रुपये का मुनाफ़ा कमाया, जिससे केरल राज्य बिजली बोर्ड (केएसईबी) को 56 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और यह सब सरकार के समर्थन से हुआ।
श्री चेन्निथला के अनुसार, इस परियोजना के लिए 'बिल्ड-ओन-ऑपरेट-ट्रांसफर' (बूट ) समझौता 31 दिसंबर, 2024 को समाप्त हो गया था। इसके बावजूद सरकार ने केएसईबी को मालिकाना हक सौंपने के बजाय, 'कार्बोरंडम यूनिवर्सल' कंपनी को इस परियोजना से अगले 14 महीनों तक बिजली उत्पादन और बिक्री जारी रखने की अनुमति दे दी।
उन्होंने दावा किया कि इस दौरान, कंपनी का परियोजना पर अनधिकृत कब्ज़ा बना रहा, उसने बड़े पैमाने पर बिजली का उत्पादन किया और उसे निजी खरीदारों को ऊंची दरों पर बेचा। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां इस संयंत्र में प्रति यूनिट बिजली उत्पादन की लागत 40 पैसे से भी कम है, वहीं कंपनी ने 'पीक आवर्स' (अधिकतम मांग वाले समय) में बिजली को 10 से 14 रुपये प्रति यूनिट की दर से बेचा, जिससे उसे भारी मुनाफ़ा हुआ। उन्होंने कहा कि केरल इस समय बिजली की कमी का सामना कर रहा है, जिसके कारण केएसईबी को बाहर से ऊंची कीमतों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है।
गौरतलब है कि मनियार परियोजना की स्थापित क्षमता 12 एमवी है, जिससे हर घंटे लगभग 12,000 यूनिट बिजली पैदा की जा सकती है।
श्री चेन्निथला ने कहा कि केएसईबी के नियंत्रण में कम लागत पर जो बिजली पैदा की जा सकती थी, वह असल में बर्बाद हो गयी। उन्होंने कहा कि हालांकि सरकार ने मौजूदा बिजली संकट के बीच परियोजना का नियंत्रण वापस लेने के आदेश जारी कर दिये हैं, लेकिन केएसईबी ने अभी तक नियंत्रण नहीं संभाला है। इस स्थिति को 'दिन-दहाड़े लूट' बताते हुए श्री चेन्निथला ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, ऊर्जा मंत्री के. कृष्णनकुट्टी और बिजली बोर्ड इसमें शामिल हैं। उन्होंने परियोजना को वापस लेने में हुई देरी की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की।
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