मुंबई , अगस्त 01 -- महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने पत्थरों पर अगंलियों की छाप को आधार पहचान संख्या से मिलाने संबंधी उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल के बयान पर शनिवार को उनकी कड़ी आलोचना की।

गौरतलब है कि उन्होंने अपने बयान में कहा है कि दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के आंदोलन के दौरान इस्तेमाल किए गए छोटे से छोटे पत्थरों से भी प्रदर्शनकारियों की उंगलियों के निशान जुटाए हैं।उन्होंने कहा कि इन निशानों को आधार नंबर से जोड़कर प्रदर्शनकारियों की पहचान की जाएगी।

श्री राज ठाकरे ने शहर में छात्र इकाई (मनसेविसे) के 20वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान पत्थरों की छाप को लेकर श्री पाटिल की विवादित टिप्पणी का मजाक उड़ाते हुए कहा, "जब मैं ऐसे जिम्मेदार मंत्रियों को इस तरह के बयान देते देखता हूं तो मेरा मन करता है कि उनके दिमाग का फिंगरप्रिंट चेक करूं। जब मंत्री इस तरह की बेतुकी बातें करेंगे तो हम 'जेन जी' के युवाओं से आपा न खोने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?"उन्होंने कहा कि श्री पाटिल को ज्ञान प्राप्त करने की उम्मीद में कोल्हापुर से पुणे भेजा गया था लेकिन राज्य के शिक्षा मंत्री के ऐसे बयानों से 'जेन जी' का निराश होना स्वाभाविक है।

आज के मतदाताओं की बदलती सोच पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि बड़े महानगरों से लेकर ग्रामीण महाराष्ट्र के सुदूर इलाकों तक आज का युवा टेलीग्राम से लेकर इंस्टाग्राम तक सामाजिक-राजनीतिक बदलावों से पूरी तरह वाकिफ है। उन्होंने मांग की कि नेता उनकी वास्तविक आकांक्षाओं को खारिज करने के बजाय उन्हें समझें।

मनसे प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए उन्हें व्यक्तिगत टिप्पणियों के मामले में राजनीतिक मर्यादा बनाये रखने और सीमाओं का सम्मान करने की सलाह दी।

सोशल मीडिया पर खुद और अपनी मां के खिलाफ अभद्र भाषा की निंदा करने वाले प्रधानमंत्री के हाल के बयानों पर टिप्पणी करते हुए मनसे प्रमुख ने कहा कि वह इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि किसी को भी किसी के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने इस मौके पर प्रधानमंत्री से भी आग्रह किया कि वे अपनी ही पार्टी के सदस्यों और समर्थकों को भी ऑनलाइन गाली-गलौज वाले व्यवहार से बचने की सलाह दें।

उन्होंने कहा कि 'दूसरों की भी मां होती है' और अभद्र भाषा के खिलाफ संदेश सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन से निपटने के तरीके पर सवाल उठाते हुए मनसे प्रमुख ने मांग की कि पिछले 10 वर्षों में छात्रों ने जो व्यवस्थागत दबाव झेला है, सरकार उसकी जवाबदेही ले।

श्री ठाकरे ने हाल ही में हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि कई लोगों का मानना था कि ये प्रदर्शन केवल नीट परीक्षा पत्र लीक के कारण हुए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदर्शनों में न केवल छात्र, बल्कि वे युवा भी शामिल थे, जो अपनी शिक्षा पूरी कर चुके हैं। ये मौजूदा परिस्थितियों के प्रति व्यापक असंतोष को दर्शाता है। उन्होंने ऐसे जनाक्रोश का कारण बनने वाली परिस्थितियां पैदा करने के लिए सरकार और सत्ता में बैठे लोगों को जिम्मेदार ठहराया।

इसके अलावा, उन्होंने बॉलीवुड हस्तियों विवेक ओबेरॉय और आर माधवन के विदेश में रहने को लेकर उनकी आलोचना की और उस देशभक्ति की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया, जिसमें भारत में सरकारी प्रायोजित परियोजनाओं की शूटिंग करना और फिर विदेश लौट जाना शामिल है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित