श्रीगंगानगर , जनवरी 27 -- अखिल भारतीय ग्रामीण खेत मजदूर यूनियन और अखिल भारतीय किसान सभा ने संयुक्त रूप से गणतंत्र दिवस पर केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में किए गए बदलावों और राम जी मिशन की नयी योजना का विरोध करने का एलान किया है।
दोनों संगठनों ने 'मनरेगा चालू करो और राम जी मिशन रद्द करो' अभियान ग्रामीण इलाकों में शुरू कर दिया है। इस अभियान के तहत बिजली के स्मार्ट मीटरों का भी कड़ा विरोध किया जा रहा है। सीटू यूनियन द्वारा 12 फरवरी की जाने वाली देशव्यापी हड़ताल को क्षेत्र में पूर्ण मजबूती प्रदान करने के लिएइन संगठनों ने समर्थन किया है। श्रीगंगानगर मुख्यालय पर 12 फरवरी को प्रदर्शन किया जाएगा।
यूनियन की प्रदेशाध्यक्ष दुर्गा स्वामी, जिलाध्यक्ष जीतसिंह और किसान सभा के जिला अध्यक्ष रिछपालसिंह ने सोमवार और मंगलवार को जिले के सीमावर्ती गांवों में मनरेगा मजदूरों की नुक्कड़ सभाओं को संबोधित किया। उन्होंने सभाओं में उपस्थित मजदूरों से कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार द्वारा राम जी मिशन नाम से नयी योजना लाकर मनरेगा को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है।
उन्होंने कहा कि यह योजना राम के नाम पर इसलिए लायी गयी है, ताकि लोगों की धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाया जा सके और मजदूर विरोधी बदलावों पर उनका विरोध कमजोर पड़े, लेकिन वास्तविकता यह है कि इस नयी योजना में जॉब कार्ड और मस्टर रोल जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं समाप्त कर दी गई हैं। काम भी ऊपर से तय होकर भेजे जाएंगे, जिससे मजदूरों की मांग के अनुसार गांवों में रोजगार उपलब्ध नहीं होगा।
मनरेगा मजदूरों को बताया गया कि ग्राम सभा से कई महत्वपूर्ण अधिकार छीन लिये गये हैं, जो सीधे तौर पर ग्रामीण मजदूरों और उनकी मजदूरी पर बुरा असर डालेंगे। मोदी सरकार सत्ता में आने के बाद से ही मनरेगा को धीरे-धीरे समाप्त करने की साजिश रच रही है। पिछले 11 वर्षों में सरकार ने कभी भी मनरेगा के लिए पूरा बजट आवंटित नहीं किया। अब राज्यों को केंद्र के 90 प्रतिशत के बजाय 60 प्रतिशत हिस्से के साथ 40 प्रतिशत का बोझ खुद उठाना होगा। जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर हुई है, जिससे न तो काम मिल पाएंगे और न ही मजदूरी का भुगतान समय पर होगा।
उन्होंने सभी ग्रामीण मजदूरों से एकजुट होकर सरकार के इन कदमों का पुरजोर विरोध करने का आह्वान किया।
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