विदिशा , जून 29 -- मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के खामखेड़ा गांव में मनरेगा योजना और ग्रामीणों के जनसहयोग से किए गए प्राचीन तालाब के जीर्णोद्धार ने गांव की तस्वीर बदल दी है। लगभग 30 बीघा क्षेत्र में फैला यह तालाब अब जल संरक्षण, आस्था और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन गया है।
गांव, जो जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित है, कभी गर्मी के दिनों में भीषण जल संकट से जूझता था। तालाब की उपेक्षा के कारण उसमें पानी का ठहराव नहीं हो पाता था, जिससे भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा था। गर्मियों में हैंडपंप और ट्यूबवेल सूख जाते थे तथा पेयजल के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता था।
जल संकट से निपटने के लिए ग्राम पंचायत ने तालाब के पुनर्जीवन का संकल्प लिया। मनरेगा योजना के तहत तालाब का गहरीकरण कराया गया, उसकी बाउंड्री वॉल को मजबूत किया गया, पुराने घाटों का जीर्णोद्धार किया गया तथा नए घाटों का निर्माण कराया गया। तालाब के आसपास स्थित धार्मिक स्थलों का भी सौंदर्यीकरण किया गया।
इस अभियान में ग्रामीणों ने भी श्रमदान और जनसहयोग के माध्यम से बढ़-चढ़कर योगदान दिया। पंचायत के सरपंच मनोज सोलंकी, सचिव प्रवीण पाल तथा रोजगार सहायक तूफान सिंह मीणा की सक्रिय भूमिका से वर्षों से उपेक्षित पड़ा तालाब पुनर्जीवित हो सका।
ग्रामीणों के अनुसार पिछले तीन वर्षों से गांव में गर्मियों के दौरान भी जल संकट की स्थिति नहीं बनी है। यह पहल सामुदायिक सहभागिता और जल संरक्षण का सफल उदाहरण बनकर उभरी है।
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