चेन्नई , जुलाई 16 -- मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा पलानी मंदिर की भूमि के पंजीकरण को निरस्त किए जाने के बाद तमिलनाडु सरकार ने मामले की जांच अपराध शाखा-अपराध जांच विभाग (सीबी-सीआईडी) को सौंप दी है।

उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ द्वारा मंदिर की भूमि को निजी लोगों को बेचे जाने के विवादित सौदे को "अमान्य" घोषित किए जाने के कुछ ही घंटों बाद, तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक महेश कुमार अग्रवाल ने जांच सीबी-सीआईडी को सौंपने का आदेश जारी किया।

यह मामला डिंडीगुल जिले में स्थित पलानी मठ की लगभग 1.35 एकड़ और करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि को कथित तौर पर बाजार मूल्य से बेहद कम कीमत पर निजी व्यक्तियों के नाम पंजीकृत किए जाने से जुड़ा है।

पलानी स्थित अरुलमिगु धंडापानी स्वामीगल मठ (भगवान मुरुगन के छह प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सी. वी. कार्तिकेयन और न्यायमूर्ति आर. शक्तिवेल की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार करते हुए निजी व्यक्तियों के पक्ष में निष्पादित बिक्री विलेख (सेल डीड) को अवैध घोषित कर दिया।

एकल न्यायाधीश ने उप -पंजीयक को निर्देश दिया था कि यदि दस्तावेज़ सही हों तो सेल डीड का पंजीकरण कर दिया जाए। अधिकारियों के अनुसार, ट्रस्ट प्रशासक होने का दावा करने वाले व्यक्तियों - मुरुगादास और तिरुपुगज़ - ने अवैध रूप से दो व्यक्तियों को ज़मीन बेच दी और दस्तावेज़ों का पंजीकरण करा लिया।

सरकार ने संपत्ति का पंजीकरण करने वाले उप पंजीयक जस्टिन मणिकंदन और ज़िला रजिस्ट्रार शशिकला को निलंबित कर दिया। उप -पंजीयक का तर्क था कि उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश के आधार पर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की थी।

उच्च न्यायालय ने सीबी-सीआईडी को मामले में जांच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 17 जुलाई तक स्थगित कर दी।

पुलिस ने उप पंजीयक और अन्य लोगों के खिलाफ भी मामले दर्ज किए हैं। जांच अब उन्हें सौंपे जाने के बाद सीबी-सीआईडी के अधिकारी मामले से जुड़े दस्तावेज़ अपने कब्जे में लेंगे और जल्द ही जांच शुरू करेंगे।

इस बीच, चेन्नई पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने पलानी मंदिर भूमि पंजीकरण प्रकरण में तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर एंड सीई) मंत्री पी. के. शेखर बाबू को सोशल मीडिया पर कथित रूप से जोड़ते हुए मानहानिकारक टिप्पणियां करने के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं, भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप में 34 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया।

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