चेन्नई , मई 01 -- दक्षिणी थूथुकुडी जिले के साथनकुलम में पिता-पुत्र की हिरासत में हुई मौत के चर्चित मामले में नौ दोषी पुलिसकर्मियों को निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय ने अपील दायर करने के लिए समय दिया है। इन नौ पुलिसकर्मियों को निचली अदालत ने दोहरी मौत की सजा सुनाई थी।

नौ दोषी पुलिसकर्मियों द्वारा दायर याचिकाओं पर गुरुवार शाम सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश और न्यायमूर्ति के. के. रामकृष्णन की खंडपीठ ने उन्हें समय प्रदान किया और मामले की अगली सुनवाई के लिए चार जून की तारीख तय की।

मदुरै के प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन ने छह अप्रैल को व्यापारी पी. जयराज (58) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) की हिरासत में हुई नृशंस हत्या के मामले में सभी नौ पुलिसकर्मियों को दोहरी मौत की सजा सुनाई थी। इससे पहले 23 मार्च को न्यायाधीश ने इन पुलिसकर्मियों को सभी आरोपों का दोषी पाया था।

मृत्युदंड पाने वाले नौ पुलिसकर्मियों में तत्कालीन निरीक्षक एस. श्रीधर, उप-निरीक्षक पी. रघुपति गणेश और के. बालकृष्णन, हेड कांस्टेबल एस. मुरुगन और ए. सामीदुरै, तथा कांस्टेबल एम. मुथुराज, एस. चेल्लादुरै, एक्स. थॉमस फ्रांसिस और एस. वेलुमुथु शामिल हैं। इस मामले में एक अन्य आरोपी विशेष उप-निरीक्षक पॉलदुरै की कोविड-19 संक्रमण के कारण पहले ही मौत हो चुकी है।

सजा सुनाते समय न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए, जिसने पूरे समाज की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है, मृत्युदंड देना ही उचित होगा। न्यायाधीश ने कहा कि यह कोई साधारण अपराध नहीं था, बेबस पिता-पुत्र को रात भर हिरासत में बेरहमी से पीटा गया। उन्होंने कहा कि बेटे के सामने पिता की और पिता के सामने बेटे की निर्दयी पिटाई को सामान्य अपराध नहीं माना जा सकता और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मृत्युदंड सही कदम है।

सीबीआई ने अपनी विस्तृत दलीलों में इसे 'दुर्लभतम से दुर्लभ' (रेरेस्ट ऑफ रेयर) मामला बताया था। जांच में सामने आया कि पुलिस ने रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की और सबूत मिटाने की कोशिश की। सीबीआई के अनुसार, पिता-पुत्र ने लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन नहीं किया था और उन पर झूठा मामला थोपा गया था।

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